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Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची सोमवार को एक अनूठे सांस्कृतिक समागम की मेजबानी करने जा रही है। पूर्वी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (EZCC), कोलकाता और संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से 8 सितम्बर 2025 को शाम 5 बजे खेलगांव स्थित होटवार परिसर के राज्य संग्रहालय सभागार में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी रविवार को EZCC के निदेशक आशीष कुमार गिरी ने दी। वह ऑड्रे हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे। श्री गिरी ने कहा पूर्वी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (EZCC) संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त संगठन है, जिसमें असम, बिहार, मणिपुर, मिजोरम, सिक्किम, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और झारखंड समेत केंद्र शासित प्रदेश अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह शामिल है।
इस विशेष अवसर पर EZCC के झारखंड प्रभारी जयदीप घोष ने कहा संगठन की ओर से प्रति वर्ष इस तरह का आयोजन किया जाता है। इस बार झारखंड और गोआ को पेयर बनाया गया है, जिसमें दोनों राज्य एक-दूसरे की संस्कृति, कला और परंपराओं को एक ही मंच पर साझा करेंगे। आयोजन समिति के अनुसार इस कार्यक्रम में लगभग 80 कलाकार और शिल्पकार हिस्सा लेंगे, जो लोक और शास्त्रीय नृत्य, हस्तशिल्प एवं हस्तकरघा की विविध प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे।
सांस्कृतिक विरासत का संगम
कार्यक्रम में झारखंड का प्रसिद्ध छऊ, झुमुर, कोडसा, डोमकच नृत्य एवं शास्त्रीय नृत्य और गोआ का देखनि नृत्य एवं समाई नृत्य मुख्य आकर्षण होगा। इसके अलावा क्षेत्रीय हस्तशिल्प और हस्तकरघा की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें शिल्पकार अपनी कला और परंपरा को लोगों के सामने प्रस्तुत करेंगे।
उद्देश्य और महत्व
‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ योजना का उद्देश्य विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। इससे न केवल विविधता में एकता की भावना मजबूत होगी बल्कि लोगों को अन्य राज्यों की कला, संस्कृति और परंपराओं को समझने का अवसर भी मिलेगा।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के लिखे दो गीतों की प्रस्तुति
कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ सी. वी. आनंदा बोस द्वारा लिखित दो गीतों की प्रस्तुति भी की जायेगी। इस दौरान श्री बोस स्वयं मौजूद रहेंगे। साथ ही, उनके साथ झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार भी रहेंगे और उनका हौशला बढ़ाएंगे।
रांची बनेगा सांस्कृतिक संगम स्थल
रांची का यह कार्यक्रम विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां न केवल पूर्वी भारत की सांस्कृतिक छटा दिखेगी, बल्कि दूसरे राज्य की झलक भी देखने को मिलेगी। स्थानीय लोगों के साथ-साथ देशभर से आने वाले पर्यटकों को भी भारतीय कला और संस्कृति की विविधता का अनुभव करने का अनूठा अवसर मिलेगा। इस अवसर पर केंद्रीय एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और सांस्कृतिक क्षेत्र की कई नामी हस्तियां भी मौजूद रहेंगी। उम्मीद है कि यह आयोजन रांची के सांस्कृतिक परिदृश्य को नई पहचान दिलाएगा।
गौरतलब हो कि प्रधानमंत्री द्वारा 31 अक्टूबर 2015 को इस कार्यक्रम की घोषणा की गई थी, जिसके बाद से देशभर में लगातार ऐसे आयोजन किए जा रहे हैं। रांची में आयोजित यह सांस्कृतिक महोत्सव भी उसी श्रृंखला की कड़ी है। आयोजकों का कहना है कि इस तरह के आयोजन युवाओं और आम नागरिकों में आपसी संवाद, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

