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Ranchi : आगामी 5 सितंबर को निकाले जाने वाले जुलूसे मोहम्मदी को लेकर सुन्नी बरैलवी सेंट्रल कमिटी ने विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। कमिटी ने सभी एदारे, तंजीम और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि वे इन निर्देशों का पालन करते हुए जुलूस को अनुशासित और सौहार्दपूर्ण तरीके से संपन्न कराएं।
समय की पाबंदी और ड्रेस कोड अनिवार्य
कमिटी के महासचिव अकीलुर्रहमान और प्रवक्ता मोहम्मद इसलाम ने बताया कि जुलूस में शामिल होने वाले सभी लोगों के लिए निर्धारित समय की पाबंदी जरूरी होगी। उन्होंने कहा कि प्रतिभागी साफ-सुथरे कपड़े पहनकर, बावजू होकर, सर पर टोपी या अमामा लगाकर ही शामिल हों।
उलेमा करेंगे नेतृत्व
गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि जुलूस का नेतृत्व हमेशा की तरह उलेमा करेंगे और सभी प्रतिभागियों को उनके पीछे चलना होगा। साथ ही, जुलूस में शामिल लोग नाते-नबी पढ़ते हुए आगे बढ़ें।
डीजे और बड़ी गाड़ियों पर रोक
कमिटी ने साफ कहा कि जुलूस में डीजे और बड़ी गाड़ियों का इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। जुलूस में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों की सजावट भी 13 फीट की ऊँचाई से अधिक नहीं होनी चाहिए।
अनुशासन और सौहार्द पर विशेष जोर
गाइडलाइन के अनुसार, जुलूस में शामिल सभी लोग एक-दूसरे के पीछे अनुशासित ढंग से चलें। साथ ही, राहगीरों, मुसाफिरों और हमवतन भाइयों की सहूलियत का पूरा ध्यान रखा जाए। कमिटी ने कहा कि जुलूस केवल धार्मिक उत्साह का प्रतीक नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और सौहार्द का संदेश देने का अवसर है।
सफाई और सजावट की अपील
कमिटी ने अपील की कि सभी मोहल्लों में साफ-सफाई और सजावट की विशेष व्यवस्था की जाए। जगह-जगह गेट और बैनर लगाकर स्वागत की तैयारी की जाए, ताकि माहौल को और अधिक खुशनुमा बनाया जा सके।
निगरानी के लिए वोलेंटियर टीम
गाइडलाइन में कहा गया है कि हर जुलूस में कम से कम 10 सदस्यीय वोलेंटियर टीम बनाई जाए, जो पूरे कार्यक्रम पर नजर रखे और अनुशासन बनाए रखने में मदद करे।
बैठक में मौजूद रहे कई गणमान्य
इस गाइडलाइन पर सहमति जताने और इसे जारी करने के लिए हुई बैठक में सुन्नी बरैलवी सेंट्रल कमिटी के सरपरस्त मोहम्मद सईद, नाजिमे आला एदारा-ए-शरिया झारखंड मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी, अध्यक्ष मौलाना डॉ. ताजुद्दीन रिजवी, महासचिव अकीलुर्रहमान, प्रवक्ता मोहम्मद इसलाम, आफताब आलम, हाजी सऊद समेत कई गणमान्य उपस्थित थे।
कमिटी ने सभी लोगों से अपील की कि वे जुलूस में शामिल होकर न सिर्फ धार्मिक आस्था प्रकट करें, बल्कि समाज में शांति, भाईचारे और अनुशासन का संदेश भी दें।

