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Ranchi News : IDBI बैंक के निजीकरण के प्रस्ताव के खिलाफ देशभर में आहूत एक दिवसीय हड़ताल को IDBI बैंक कर्मचारी और अधिकारी संघ, झारखंड प्रदेश ने पूर्ण समर्थन दिया। सोमवार को राजधानी रांची स्थित मेन रोड शाखा के सामने बड़ी संख्या में बैंक कर्मी और अधिकारी एकजुट हुए और सरकार के खिलाफ जोरदार नारे लगाए।
संघ के महासचिव अंशु कुमार ने कहा कि सरकार का IDBI बैंक का निजीकरण करने का फैसला जमाकर्ताओं और बैंकिंग सेवाओं के हित में नहीं है। यह हड़ताल केंद्र सरकार और LIC की हिस्सेदारी के प्रस्तावित विनिवेश के विरोध में आयोजित की गई। वर्तमान में IDBI बैंक में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत और LIC की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत है, जिसके चलते जमाकर्ताओं को सॉवरेन गारंटी का लाभ मिलता है। उन्होंने चेतावनी दी कि निजीकरण होने के बाद यह सुरक्षा समाप्त हो जाएगी और केवल डीआईसीजीसी कवर के तहत पांच लाख रुपये तक की जमा राशि ही सुरक्षित रहेगी।
अंशु कुमार ने आगे बताया कि बैंक द्वारा वर्तमान में किसानों को KCC के तहत ऋण, चार लाख रुपये तक के असुरक्षित ऋण, जनधन खाते, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) जैसी कई सरकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। निजीकरण के बाद ये सभी सेवाएं प्रभावित होंगी, क्योंकि निजी मालिक केवल लाभ आधारित योजनाओं पर ध्यान देंगे।
उन्होंने कहा कि IDBI बैंक का गठन 1964 में भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अधिनियम के तहत एक विकास वित्त संस्थान के रूप में हुआ था और 2004 में यह भारतीय रिजर्व बैंक की सहायक कंपनी बनी। ऐसे ऐतिहासिक संस्थान का निजीकरण न केवल बैंक कर्मचारियों बल्कि आम जनता के लिए भी नुकसानदायक होगा।
इस मौके पर झारखंड प्रदेश के विभिन्न शाखाओं और क्षेत्रीय कार्यालयों से जुड़े बैंक अधिकारियों, कर्मचारियों और यूनियन सदस्यों ने हड़ताल में भाग लिया। सभी ने एक स्वर में सरकार से निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि मांग नहीं मानी गई तो आगे आंदोलन और तेज किया जाएगा।

