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Ranchi News : सिविल कोर्ट रांची में अपर न्यायायुक्त एके तिवारी की अदालत ने चेक बाउंस मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कांके थाना क्षेत्र के बाउ कैंपस, डिमॉन्स्ट्रेटर कॉलोनी निवासी लालू जॉब की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखा है।
यह मामला वर्ष 2022 का है, जब शिकायतकर्ता मनोज कुमार सिंह को लालू जॉब ने ₹2,50,000 का चेक दिया था। यह चेक पंजाब नेशनल बैंक, एचईसी शाखा से जारी किया गया था। शिकायतकर्ता ने 14 सितंबर 2022 को चेक जमा किया, लेकिन अगले ही दिन बैंक से ‘फंड्स इंसफिशिएंट’ का कारण बताकर चेक को बाउंस कर दिया गया।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने 22 सितंबर 2022 को आरोपी को नोटिस भेजा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अंततः 1 नवंबर 2022 को धारा 138, परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, रांची की अदालत में मामला दर्ज किया गया।
न्यायिक दंडाधिकारी एकता सक्सेना ने 4 सितंबर 2024 को आरोपी लालू जॉब को दोषी ठहराते हुए 6 महीने की साधारण कारावास, ₹3.5 लाख का मुआवजा और ₹5,000 का जुर्माना लगाया था। इस फैसले के खिलाफ लालू जॉब ने ऊपरी अदालत में अपील की थी।
हालांकि, अपर न्यायायुक्त एके तिवारी की अदालत ने माना कि निचली अदालत का फैसला साक्ष्यों के आधार पर उचित है और उसमें किसी प्रकार का हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। अदालत ने अपील खारिज करने के साथ ही पहले से मिली जमानत को भी रद्द कर दिया है।
अदालत ने आरोपी लालू जॉब को ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद से मामले में एक बड़ा मोड़ आ गया है, क्योंकि अब आरोपी को सजा भुगतनी होगी।
यह मामला न केवल आर्थिक अपराध से जुड़ा हुआ है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि न्यायालय चेक बाउंस जैसे मामलों में सख्त रवैया अपनाने से पीछे नहीं हटते। अदालत का यह फैसला उन लोगों के लिए चेतावनी है जो वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता नहीं रखते और धोखाधड़ी करने का प्रयास करते हैं।

