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Ranchi News : झारखंड आंदोलन के महानायक, अलग राज्य निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाने वाले और “बाबा-ए-झारखंड” के नाम से मशहूर दिशोम गुरु वीर शिबू सोरेन के निधन से पूरा राज्य शोक में डूब गया है। आदिवासी समाज के इस महान नेता के जाने की खबर सुनते ही राज्यवासियों में गम का माहौल है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के सदस्य डॉ जमाल अहमद ने शिबू सोरेन को भावपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुए कहा “उनका जाना झारखंड के लिए एक युग का अंत है। उनके निधन से संघर्ष, न्याय और समानता की आवाज थम गई। उन्होंने सामाजिक चेतना और संघर्ष की जो विरासत छोड़ी है, वह झारखंड के इतिहास में सदैव जीवित रहेगी। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे”
गुरुजी का अमूल्य योगदान

डॉ जमाल अहमद ने कहा कि शिबू सोरेन ने झारखंड की पहचान, अस्तित्व और स्वायत्तता के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया। उनका योगदान ही वह नींव है जिस पर आज का झारखंड खड़ा है। गुरुजी हमेशा सभी वर्गों के उत्थान और कल्याण के लिए चिंतित रहते थे। वे अक्सर कहा करते थे कि जब तक लोग अपने अधिकारों के लिए खड़े नहीं होंगे, तब तक झारखंड का असली कल्याण नहीं हो सकता। उन्होंने शिक्षा, संगठन और अधिकारों की जागरूकता पर विशेष बल दिया। गुरुजी के विचार और उनकी नीतियां हमें यह सिखाती हैं कि समाज में हर वर्ग का उत्थान तभी संभव है जब हम न्याय और समानता के लिए मिलकर संघर्ष करें।
व्यक्तिगत क्षति और प्रेरणा
डॉ जमाल ने कहा शिबू सोरेन का निधन न केवल राजनीतिक बल्कि व्यक्तिगत रूप से भी बहुत बड़ी क्षति है। जो लोग उन्हें करीब से जानते थे, उनके लिए यह खबर बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा गुरुजी जैसे लोग वास्तव में कभी नहीं जाते। उनके योगदान, मार्गदर्शन और प्रेरणा को सदियों तक याद किया जाएगा। डॉ जमाल ने कहा “उनकी सोच, संघर्ष और समाज के लिए किए गए बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे। हमें उनके विचारों पर चलते हुए ही झारखंड को उनके सपनों का राज्य बनाना होगा।

