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New Delhi: भारत में देवी सरस्वती को विद्या, बुद्धि और कला की अधिष्ठात्री माना जाता है। बसंत पंचमी हो या कोई शुभ अवसर, भक्त ज्ञान की देवी की आराधना करते हैं। क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में मां सरस्वती के कुछ ऐसे प्राचीन और भव्य मंदिर हैं, जिनका इतिहास सदियों पुराना है? उत्तराखंड की पहाड़ियों से लेकर तमिलनाडु के तटों तक, ये 5 मंदिर श्रद्धा और पर्यटन का अद्भुत केंद्र हैं।
1. माता सरस्वती मंदिर, उत्तराखंड (माणा गांव)
बद्रीनाथ से महज 3 किलोमीटर दूर माणा गांव में स्थित यह मंदिर बेहद खास है। इसे देवी सरस्वती का जन्मस्थान माना जाता है। यहां सरस्वती नदी एक दिव्य धारा के रूप में प्रकट होती है। मान्यता है कि इसी पावन स्थल पर महर्षि वेद व्यास ने ‘महाभारत’ की रचना की थी। यहां पास में ही प्रसिद्ध भीम शिला भी मौजूद है।
2. शारदा पीठ, राजस्थान (पिलानी)
झुंझुनू के पिलानी में स्थित यह मंदिर सफेद मकराना संगमरमर से बना वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है। 1959 में निर्मित यह मंदिर 70 खंभों पर टिका है। इसकी बनावट ऐसी है कि इसका 110 फीट ऊंचा शिखर सीधे बिट्स (BITS) पिलानी के क्लॉक टॉवर की सीध में नजर आता है।
3. सावित्री देवी मंदिर, पुष्कर (राजस्थान)
पुष्कर की रत्नागिरी पहाड़ी पर करीब 750 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर ब्रह्मा जी की पत्नियों, माता सावित्री और गायत्री को समर्पित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए 970 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जहां से पुष्कर झील का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
4. कूथनूर महा सरस्वती मंदिर, तमिलनाडु
तमिलनाडु के तिरुवरुर जिले में स्थित यह मंदिर दक्षिण भारत में मां सरस्वती का प्रमुख धाम है। लोक कथाओं के अनुसार, यहां अरसलार नदी के रूप में सरस्वती प्रवाहित होती हैं। इस स्थान का संबंध प्रसिद्ध कवि ओट्टक्कूथन से भी है, जिन्हें चोल राजा ने यह भूमि दान में दी थी।
5. श्री शारदाम्बा मंदिर, कर्नाटक (शृंगेरी)
तुंगा नदी के तट पर स्थित इस मंदिर की स्थापना 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य जी ने की थी। शुरुआत में यहां चंदन की लकड़ी की प्रतिमा थी, जिसे बाद में 14वीं शताब्दी में विजयनगर के शासकों ने स्वर्ण प्रतिमा में बदल दिया। यह मंदिर दक्षिण भारत में शिक्षा और ज्ञान का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।
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