Ranchi : झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सोमवार को राज्य सरकार ने एक बड़ा वित्तीय कदम उठाते हुए 4296 करोड़ 62 लाख रुपये से अधिक का प्रथम अनुपूरक बजट पारित करा लिया। यह निर्णय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों के बहिष्कार के बीच ध्वनिमत से लिया गया। इसके साथ ही सदन ने झारखंड विनियोग (संख्या 3) विधेयक 2025 को भी मंजूरी प्रदान कर दी।
भोजनावकाश के बाद भाजपा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने कटौती प्रस्ताव पेश किया और सरकार की कमियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की योजनाएं धरातल पर प्रभावी रूप से लागू नहीं हो रही हैं और जनता तक अपेक्षित लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। इस पर झामुमो विधायक हेमलाल मुर्मू ने पलटवार करते हुए कहा कि कटौती प्रस्ताव लाने की आवश्यकता ही नहीं थी, क्योंकि पूर्ण बजट पहले ही पारित हो चुका है। उन्होंने इसे कार्य संचालन नियमावली के विरुद्ध भी बताया।
इस दौरान सदन में तीखी बहस हुई और हंगामे की स्थिति पैदा हो गई। नतीजतन, विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने कार्यवाही को 3:30 बजे तक स्थगित कर दिया।
जब सदन की बैठक पुनः शुरू हुई तो अनुपूरक बजट पर चर्चा का जवाब राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने दिया। उन्होंने बताया कि इस बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, बुनियादी ढांचे और सामाजिक सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का उद्देश्य विकास की गति तेज करना और जरूरतमंद वर्गों तक सीधी मदद पहुंचाना है।
वित्त मंत्री ने कहा, “राज्य हित और जनहित को देखते हुए अनुपूरक बजट आवश्यक था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में वित्तीय प्रबंधन मजबूत है और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र पर सरकार अधिक निवेश कर रही है।”
लेकिन मंत्री के जवाब से भाजपा विधायक संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने सदन से वॉकआउट कर दिया। इसके बाद अनुपूरक बजट को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
इससे पहले कांग्रेस विधायक राजेश कच्छप ने भी सदन में अपने विचार रखे और बजट प्रावधानों का समर्थन किया। अंततः विधानसभा अध्यक्ष ने दिन की कार्यवाही स्थगित करते हुए घोषणा की कि सदन की अगली बैठक मंगलवार सुबह 11 बजे होगी।



