Bihar News: बिहार में इन दिनों मतदाता सूची पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) का काम तेज़ी से चल रहा है। इस प्रक्रिया के तहत नागरिकों से आवश्यक दस्तावेज मांगकर मतदाता सूची को अपडेट किया जा रहा है। लेकिन इसी दौरान बिहार के सीमांचल जिलों से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जिन्होंने राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया है।
बिहार के किशनगंज, कटिहार, अररिया और पूर्णिया जिलों में आधार सेचुरेशन 120% से भी अधिक तक पहुंच गया है। यानी इन जिलों में जितनी जनसंख्या है, उससे 20-26% अधिक लोगों के पास आधार कार्ड हैं। सामान्यतः आधार सेचुरेशन का आंकड़ा 100% के आसपास रहना चाहिए, लेकिन यहां यह 126% तक जा पहुंचा है, जो किसी बड़ी विसंगति की ओर इशारा करता है।
जिलावार आंकड़े देखें तो स्थिति और भी गंभीर लगती है।
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किशनगंज: मुस्लिम आबादी 68%, आधार सेचुरेशन 126%
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कटिहार: मुस्लिम आबादी 44%, आधार सेचुरेशन 123%
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अररिया: मुस्लिम आबादी 43%, आधार सेचुरेशन 123%
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पूर्णिया: मुस्लिम आबादी 38%, आधार सेचुरेशन 121%
इन आंकड़ों के अनुसार, हर 100 लोगों पर 120 से अधिक आधार कार्ड दर्ज हैं। इससे आधार की बुनियादी नीति ‘एक व्यक्ति, एक पहचान’ पर सवाल उठ रहे हैं। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार यह न केवल सिस्टम की गड़बड़ी की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि क्या कहीं फर्जी पहचान पत्र या अवैध घुसपैठियों के नाम पर आधार कार्ड जारी किए गए हैं?
क्या है घुसपैठ की आशंका?
सीमांचल इलाके की भौगोलिक स्थिति भी सवालों के घेरे में है। ये जिले बांग्लादेश सीमा के नज़दीक हैं और पहले भी यहां घुसपैठ की आशंकाएं जताई जा चुकी हैं। इतनी बड़ी संख्या में अतिरिक्त आधार कार्डों का जारी होना इस संदेह को और बल देता है कि क्या अवैध रूप से आए विदेशी नागरिकों को दस्तावेजों के बिना ही आधार कार्ड जारी कर दिए गए हैं?
अगर ऐसा है, तो यह न केवल चुनावी पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है बल्कि सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग का भी बड़ा खतरा है।
चुनाव आयोग का बयान साफ
मुख्य चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा। मतदाता सूची में नाम शामिल करने या हटाने का आधार केवल दस्तावेज नहीं हो सकते। इसके बावजूद, राज्य में इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक घमासान मचा हुआ है।
विपक्ष का विरोध और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
राजद और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों ने मतदाता सूची को आधार से जोड़ने की प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है, इसलिए इसके आधार पर किसी को वोटिंग अधिकार से वंचित करना संविधान के खिलाफ है। तेजस्वी यादव ने तो इस मुद्दे पर बिहार बंद तक बुलाया था। इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हो रही है।
भाजपा का पलटवार
वहीं, भाजपा ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सीमांचल क्षेत्र में आधार सेचुरेशन का बढ़ा हुआ आंकड़ा चुनावी हेरफेर और अवैध घुसपैठ की साजिश की ओर इशारा करता है। उनका कहना है कि यह बिहार की डेमोग्राफी को बदलने की साजिश का हिस्सा हो सकता है।
अब आगे क्या?
इस समय ज़रूरत है निष्पक्ष जांच की। एक तरफ सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी फर्जी पहचान से वोटर न बने, वहीं दूसरी ओर यह भी ध्यान रखना होगा कि असली नागरिकों के अधिकारों का हनन न हो। यह मामला सिर्फ डेटा का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों का भी है।



