New Delhi: पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा शनिवार को आयोजित 18वें रोजगार मेले ने देशभर के 61 हजार से अधिक युवाओं के भविष्य को एक नई दिशा दी है। नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले इन युवाओं के चेहरों पर न केवल कामयाबी की खुशी थी, बल्कि देश सेवा का अटूट आत्मविश्वास भी झलक रहा था। नागपुर की गलियों से लेकर चंडीगढ़ के मैदानों तक, हर चयनित अभ्यर्थी की अपनी एक संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक कहानी है।
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सीआरपीएफ और सीआईएसएफ में मिली कामयाबी: महाराष्ट्र के नागपुर के एक युवा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने लाइब्रेरी इंस्ट्रक्टर को दिया, जिनके मार्गदर्शन ने उन्हें सीआरपीएफ (CRPF) तक पहुँचाया। वहीं, चंडीगढ़ के एक अभ्यर्थी ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि कैसे उम्र सीमा के कारण सेना में जाने का सपना टूटने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और एसएससी जीडी (SSC GD) की मेहनत से सीआईएसएफ (CISF) में जगह बनाई। उनकी ट्रेनिंग 16 फरवरी से राजस्थान के देओली में शुरू होने वाली है।
बेटियों ने तोड़ी रूढ़ियां: “बीएसएफ मेरा जुनून है”: इस मेले की एक खास तस्वीर गुजरात के गांधीनगर से आई, जहाँ एक युवती ने समाज की रूढ़िवादी सोच को चुनौती देते हुए बीएसएफ (BSF) में शामिल होकर अपना बचपन का सपना पूरा किया। उन्होंने गर्व से कहा कि लोग लड़कियों को सीमा पर जाने से रोकते थे, लेकिन आज उन्होंने साबित कर दिया कि बेटियां भी देश की रक्षा के लिए तैयार हैं।
पारदर्शी प्रक्रिया और परिवार का सहयोग: दिल्ली के युवाओं ने रोजगार मेले की पारदर्शी चयन प्रक्रिया की सराहना करते हुए इसे पीएम का एक बेहतरीन कदम बताया। कई युवाओं के लिए यह दोहरी खुशी का मौका था, जैसे आईटीबीपी (ITBP) में चयनित एक युवक, जिसका भाई पहले से सीआईएसएफ में तैनात है।
पीएम मोदी के विजन ने इन हजारों परिवारों में खुशियों का नया बसंत ला दिया है। युवाओं का मानना है कि इस तरह के आयोजन न केवल रोजगार प्रदान करते हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रति उनकी जिम्मेदारी का अहसास भी कराते हैं।



