Health News: दिसंबर की कड़ाके की ठंड अपने साथ सिर्फ ठिठुरन ही नहीं, बल्कि त्वचा की कई समस्याएं भी लेकर आई है। इन दिनों गालों का फटना, होंठों से खून आना और त्वचा का पपड़ीदार होना एक बड़ी मुसीबत बन गया है। आयुर्वेद और विशेषज्ञों की मानें तो यह सिर्फ बाहरी समस्या नहीं है, बल्कि हमारे शरीर के भीतर बढ़ते ‘वात दोष’ और पोषक तत्वों की कमी का नतीजा है।

आयुर्वेद का ‘अभ्यंग’ और देसी घी का जादू

जब गाल फटने लगें और दर्द बढ़ जाए, तो महंगे केमिकल वाले क्रीम के बजाय आयुर्वेद के ‘अभ्यंग’ (तेल मालिश) को अपनाएं। रात को सोने से पहले शुद्ध देसी घी या हल्का गुनगुना बादाम तेल गालों पर लगाएं। घी त्वचा की परतों के भीतर तक जाकर प्राकृतिक नमी प्रदान करता है। अगर आप तेल से चिपचिपाहट महसूस करते हैं, तो एलोवेरा जेल और शहद का मिश्रण लगाएं। शहद नमी को लॉक करता है और एलोवेरा जख्मों को भरने में मदद करता है।

चेहरा धोने की आदत और गर्म पानी से बचें

अक्सर हम ठंड से बचने के लिए बहुत गर्म पानी से चेहरा धोते हैं, जो त्वचा के प्राकृतिक तेल को सोख लेता है। कोशिश करें कि चेहरा धोने के लिए केवल गुनगुने पानी और हर्बल फेसवॉश का ही प्रयोग करें। बार-बार चेहरा धोने से बचें। बाहर निकलते समय चेहरे को स्कार्फ से ढकें ताकि सीधी सर्द हवा त्वचा की नमी न चुरा सके।

डाइट में शामिल करें ‘सुपरफूड्स’

त्वचा को बाहर से ज्यादा अंदरूनी पोषण की जरूरत होती है। अपने आहार में खजूर, बादाम, गर्म दूध और पर्याप्त पानी शामिल करें। पानी की कमी सर्दियों में सबसे ज्यादा होती है, जिससे त्वचा सुस्त पड़ जाती है। नारियल और घी का सेवन शरीर की अंदरूनी खुश्की को खत्म करता है, जिससे गाल फटने की समस्या जड़ से खत्म हो सकती है।

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