Health News: कोरोना संक्रमण के बाद धमनियों में ऐसे परिवर्तन देखे गए हैं जो आमतौर पर उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से जुड़े होते हैं। यानी, जो बदलाव सामान्यत: पांच साल या उससे भी बाद में होने चाहिए थे, COVID-19 ने उन्हें समय से पहले ही पैदा कर दिया है। नए अंतरराष्ट्रीय शोध में बताया गया है कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ धमनियां लचीलेपन को खो देती हैं और सख्त होने लगती हैं। यही स्थिति COVID-19 संक्रमण के बाद भी देखने को मिली। इससे हृदय रोग, स्ट्रोक और दिल के दौरे जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। COVID-19 संक्रमण का असर सिर्फ फेफड़ों या इम्यून सिस्टम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी रक्त वाहिकाओं पर भी गहरा असर डाल रहा है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह प्रभाव संक्रमण को झेलने के बाद भी लंबे समय तक बना रह सकता है। यूनिवर्सिटी पेरिस सिटे, फ्रांस की प्रोफेसर रोजा मारिया ब्रूनो के अनुसार, “COVID-19 सीधे तौर पर रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता है। इसका नतीजा यह होता है कि आपकी रक्त वाहिकाएं आपकी वास्तविक उम्र से अधिक उम्रदराज हो जाती हैं, जिससे हृदय रोग का खतरा और बढ़ जाता है।” इसमें 16 देशों के 2,390 प्रतिभागियों को शामिल किया गया था। शोधकर्ताओं ने सितंबर 2020 से फरवरी 2022 के बीच एकत्र किए गए डेटा का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि COVID-19 से संक्रमित मरीजों की धमनियां उन लोगों की तुलना में अधिक कठोर थीं, जो कभी संक्रमित नहीं हुए थे।
दिलचस्प बात यह रही कि यह प्रभाव केवल गंभीर मरीजों में ही नहीं, बल्कि हल्के संक्रमण से गुजरने वाले लोगों में भी पाया गया। नतीजों में यह भी सामने आया कि महिलाओं और लॉन्ग COVID से जूझ रहे मरीजों पर इसका असर ज्यादा था। सांस लेने में तकलीफ और थकान जैसे लक्षण झेलने वालों की रक्त वाहिकाएं अधिक तेजी से कठोर पाई गईं। प्रोफेसर ब्रूनो का मानना है कि इसका कारण महिलाओं की प्रतिरक्षा प्रणाली हो सकती है, जो पुरुषों की तुलना में अधिक सक्रिय और तेज होती है।
हालांकि यही मजबूती कभी-कभी रक्त वाहिकाओं को अतिरिक्त नुकसान भी पहुंचा सकती है। अध्ययन ने एक राहत देने वाला पहलू भी उजागर किया। जिन लोगों ने COVID-19 वैक्सीन लगवाई थी, उनकी धमनियों में कठोरता का असर अपेक्षाकृत कम पाया गया। लंबे समय में संक्रमित लोगों की स्थिति स्थिर होती या थोड़ी सुधरती भी देखी गई। शोध से साफ है कि COVID-19 केवल एक संक्रमण नहीं, बल्कि लंबी अवधि में शरीर के अंगों की कार्यप्रणाली पर असर डालने वाली बीमारी है।



