अपनी भाषा चुनेें :
बटन दबाकर थोड़ा इंतज़ार करें...
India News: शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व से पहले मोदी सरकार ने देशभर में GST रेट में कटौती की घोषणा की थी। इस फैसले के तहत साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट, टूथब्रश, पैकेज्ड फूड, बिस्किट, कॉर्नफ्लेक्स, पनीर, दही, पराठा जैसे रोजमर्रा के कई उत्पाद अब पहले से सस्ते हो गए हैं। पहले इन पर 18 प्रतिशत तक टैक्स लगता था, लेकिन अब इसे घटाकर 5 प्रतिशत या पूरी तरह से शून्य कर दिया गया है।
इस कटौती के बाद घरेलू बाजार में इन चीजों की कीमतों में औसतन 10 से 15 प्रतिशत तक की कमी आई है। मसलन, पहले अगर किसी ब्रांडेड शैम्पू की बोतल 200 रुपये की थी, तो 18 प्रतिशत GST के बाद इसकी कीमत 236 रुपये तक पहुंच जाती थी। अब 5 प्रतिशत GST के बाद यही बोतल लगभग 210 रुपये में मिल रही है। इसी तरह टूथपेस्ट, साबुन और पैकेज्ड स्नैक्स पर 20–25 रुपये की बचत संभव है। दूध और पनीर जैसे डेयरी उत्पादों पर GST पूरी तरह हट जाने से मध्यमवर्गीय परिवारों को सीधी राहत मिली है।
हालांकि, यह सवाल उठता है कि GST कटौती के बाद भी भारत में रोजमर्रा का सामान दुनिया के अन्य देशों की तुलना में महंगा है या सस्ता। इस मामले में आंकड़े बताते हैं कि भारत अभी भी दुनिया के सबसे किफायती देशों में शामिल है। 2018 में हुए अंतरराष्ट्रीय सर्वे के मुताबिक, भारत किराने के सामान, खाने-पीने की चीजों और किराए के मामले में सबसे सस्ते देशों की सूची में टॉप पर था। 2025 में भी यह स्थिति बहुत हद तक बनी हुई है।
इसके बावजूद कुछ देशों में चुनिंदा सामान भारत से सस्ता मिल सकता है। उदाहरण के लिए, दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों जैसे बांग्लादेश, नेपाल, वियतनाम और इंडोनेशिया में स्थानीय उत्पादन होने के कारण फल, सब्जियां और कुछ खाद्य पदार्थ भारत से कम दाम पर उपलब्ध हैं। वहीं मध्य-पूर्व के देशों जैसे सऊदी अरब और यूएई में पेट्रोल और उससे जुड़े उत्पाद सब्सिडी के कारण भारत से सस्ते मिलते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि GST कटौती का सबसे बड़ा फायदा आम उपभोक्ता को होता है। रोजमर्रा के उपयोग की चीजें सस्ती होने से घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ता है। खासकर मध्यमवर्गीय और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों को इसका लाभ महसूस होता है।
आने वाले दिनों में उपभोक्ता ब्रांडेड और पैकेज्ड सामान पर बचत के साथ ही अपने खर्चों को नियंत्रित कर सकते हैं। इसके अलावा, स्थानीय बाजार में प्रतियोगिता बढ़ने से कीमतों में स्थायित्व भी देखने को मिल सकता है।
इस तरह, GST कटौती न सिर्फ महंगाई को कम करने की दिशा में कदम है, बल्कि आम आदमी की जेब पर सीधे असर डालने वाला उपाय भी है। फिर भी, यह याद रखना जरूरी है कि कुछ विदेशी देशों में अभी भी कुछ चुनिंदा सामान भारत की तुलना में सस्ता उपलब्ध है, खासकर जहां स्थानीय उत्पादन और सब्सिडी अधिक है।

