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Kolkata: पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र के उत्सव के बीच हिंसा का काला साया गहरा गया है। विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान राज्य के अलग-अलग हिस्सों से हिंसक झड़पों की डराने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। सबसे गंभीर घटना दक्षिण 24 परगना के बसंती क्षेत्र में घटी, जहां भाजपा उम्मीदवार विकास सरदार को भीड़ ने निशाना बनाया। जब वे बूथ नंबर 76 का मुआयना करने पहुंचे, तो उपद्रवियों ने उनकी गाड़ी में जमकर तोड़फोड़ की। हद तो तब हो गई जब उनके सुरक्षाकर्मियों से हथियार छीनने की कोशिश की गई। आरोप है कि मौके पर मौजूद केंद्रीय बल तमाशबीन बने रहे और कोई दखल नहीं दिया।
हिंसा का यह सिलसिला हुगली-चुचुड़ा तक भी जा पहुंचा, जहां सड़क किनारे लगे तृणमूल के चुनावी बैनरों को हटाने पर जमकर बवाल हुआ। यहां के कुछ बूथों पर तो वोटर लिस्ट तक फाड़ दी गई, जिसके बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं और केंद्रीय बलों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। वहीं, पानीहाटी के बूथ नंबर 145 पर भाजपा और टीएमसी समर्थकों के बीच जमकर हाथापाई हुई। सुरक्षा बलों को मोर्चा संभालना पड़ा, तब कहीं जाकर स्थिति नियंत्रण में आई।
हावड़ा के बाली में भी माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। यहां ईवीएम में खराबी के कारण गुस्साए मतदाताओं ने हंगामा शुरू कर दिया। हालात बिगड़ते देख केंद्रीय बलों को लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसमें दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उत्तर 24 परगना के सासन इलाके में भी ग्रामीणों ने टीएमसी कार्यकर्ताओं का कड़ा विरोध किया। आरोप लगा कि वे वोटरों को डरा-धमका रहे थे।
नदिया जिला भी अछूता नहीं रहा; करीमपुर में एक पुलिस अधिकारी द्वारा कथित तौर पर टीएमसी के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने का मामला सामने आया है। वहीं, छपरा में भाजपा के पोलिंग एजेंट मोशर्रफ मीर पर बेरहमी से हमला किया गया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोटें आई हैं। हां, अस्पताल में भर्ती मोशर्रफ की हालत को देखकर इलाके के लोगों में भारी रोष है। इन घटनाओं ने चुनाव आयोग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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