India News: सोचो, शादी का घर है। धूम-धड़ाका, रिश्तेदारों की भीड़, नाच-गाना, और गिफ्ट्स का ढेर। इधर वरमाला हो रही है और उधर सोने के सेट, नकद लिफाफे और तोहफों की बरसात। भारतीय शादियां सिर्फ रस्मों तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि इनका सामाजिक और आर्थिक असर भी होता है। इन भव्य समारोहों में गिफ्ट्स का आदान-प्रदान परंपरा का अहम हिस्सा है- कभी नकद रूप में, तो कभी सोने-चांदी या कीमती वस्तुओं के रूप में। क्या शादी में मिले ये तोहफे टैक्स के दायरे में आते हैं? ‘नहीं’, अगर गिफ्ट शादी के मौके पर मिला हो।
अब इस बीच एक सवाल कई दिमाग में चुपके से आता है — “यार, ये इतने सारे गिफ्ट… इन पर टैक्स लगता है क्या?”
अगर आपका भी यही सवाल है, तो जवाब सुनकर राहत मिलेगी।
आयकर कानून के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति को गिफ्ट उसके करीबी रिश्तेदारों से मिलता है जैसे माता-पिता, भाई-बहन, जीवनसाथी, ससुराल वाले या वंशानुगत रिश्तेदार- तो वह पूरी तरह टैक्स फ्री है, लेकिन अगर गिफ्ट किसी गैर-रिश्तेदार या दोस्त से मिले और उसकी कुल कीमत एक वित्तीय वर्ष में 50,000 रुपए से ज्यादा हो, तो उस पर टैक्स देना पड़ता है। इन गिफ्ट्स में नकद राशि, सोना, ज्वेलरी, शेयर या प्रॉपर्टी शामिल हो सकती है। ऐसे गिफ्ट्स को आयकर रिटर्न के तहत दिखाना जरूरी है।
शादी में मिले गिफ्ट = पूरी तरह टैक्स फ्री
जी हां, बिल्कुल सही सुना। आयकर विभाग साफ कहता है —
शादी के मौके पर मिला गिफ्ट टैक्स के दायरे में नहीं आता।
चाहे वो नकद हो, सोना हो, प्रॉपर्टी हो या कोई कीमती चीज। बस शर्त ये है कि वो गिफ्ट शादी के अवसर पर मिला हो।
यानी रिसेप्शन, जयमाला, विदाई, फेरे — इनसे जुड़े कार्यक्रमों पर दिया गया गिफ्ट पूरी तरह फ्री है।
किसी अंकल ने 1 लाख दे दिए?
सगी बुआ ने सोने का हार दिया?
फूफा जी ने गाड़ी दे दी?
कोई टैक्स नहीं।
यहां तक कि दोस्त ने महंगा लैपटॉप या कैश दिया — फिर भी टैक्स नहीं, अगर वो शादी वाले फंक्शन से जुड़ा गिफ्ट हो।
लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं होती…
शादी के बाहर वाला मामला थोड़ा ट्विस्ट वाला है।
अगर कोई गिफ्ट आपको:
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जन्मदिन पर
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सालगिरह पर
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हाउसवॉर्मिंग में
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या सिर्फ ऐसे ही
देता है, और उसकी कीमत ₹50,000 से ज़्यादा है, तो टैक्स देना पड़ेगा। लेकिन एक और बड़ा पॉइंट…
रिश्तेदारों से मिले गिफ्ट हमेशा टैक्स फ्री
अगर गिफ्ट इन रिश्तेदारों से मिले हों तो कोई टैक्स नहीं, चाहे कितनी भी कीमत हो:
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माता-पिता
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भाई-बहन
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पति/पत्नी
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दादा-दादी
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ससुर-सास
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चाचा-चाची / मामा-मामी / मौसी-फूफा / बुआ-फूफा
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बच्चे और बहू-दामाद
तो कल्पना करो, अगर मम्मी ने शादी में कार दे दी… या ससुराल वालों ने ज्वेलरी बॉक्स दे दिया…
सारा टैक्स फ्री!
ध्यान रहे — रिकॉर्ड रखें
शादी में मिले गिफ्ट्स की लिस्ट बनाना समझदारी है — कभी भविष्य में आयकर विभाग सवाल करे तो डिटेल्स हाथ में रहें।
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किसने दिया
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क्या दिया
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कब दिया
बस इतना नोट रखना काफी है। क्योंकि भाई, शादी में तोहफ़े मिलते हैं, “इनकम” नहीं।
आख़िर मतलब क्या?
शादी सिर्फ दिल का रिश्ता नहीं जोड़ती, अगर स्मार्ट तरीके से संभालो, तो फाइनेंशियल शुरुआत भी मजबूत करती है। बस नियम पता हों, तो टैक्स का डर नहीं रहता।



