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New Delhi: दुनियाभर में जब कभी युद्ध, आर्थिक मंदी या महामारी जैसी आपदाएं आती हैं, तब दुनिया भर के निवेशक सबसे पहले सोने की शरण में जाते हैं। दरअसल हजारों सालों से सोने को सेफ हेवन यानी सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन इस बार पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच बेहद अजीब नजारा दिखाई दिया है। एक ओर जहां कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं सोने के दाम लगातार गिर रहे हैं। भारत में भी 24 कैरेट सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ चुका है, जिससे आम आदमी और निवेशक दोनों हैरान हैं।
आमतौर पर इतिहास में देखा गया है कि 2008 की मंदी हो या कोरोना काल, निवेशकों ने शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने में लगा दिया था। मगर इस बार कहानी बिल्कुल बदली दिख रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह ब्याज दरें और सरकारी बॉन्ड हैं। सोना खुद कोई ब्याज नहीं देता, जबकि इस समय वैश्विक केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा रख रहे हैं। इसके बाद निवेशकों को सरकारी बॉन्ड में निवेश करना ज्यादा फायदेमंद लग रहा है क्योंकि वहां उन्हें निश्चित रिटर्न मिल रहा है। इस कारण लोग सोने से अपना पैसा निकालकर बॉन्ड मार्केट की ओर डाइवर्ट कर रहे हैं।
डॉलर की मजबूती बड़ा कारण
एक और महत्वपूर्ण कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का व्यापार डॉलर में होता है। तेल की कीमतें बढ़ने के कारण देशों को भुगतान के लिए ज्यादा डॉलर की जरूरत होती है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है और वह दिन-प्रतिदिन मजबूत हो गया है। जब डॉलर मजबूत होता है, तब सोना खरीदना महंगा हो जाता है, इससे पीली धातु की मांग में कमी आती है और कीमतें गिर जाती हैं। साथ ही, जिन निवेशकों ने बीते कुछ सालों में सोने से अच्छा मुनाफा कमाया था, वे अब गिरते बाजार को देखकर अपनी प्रॉफिट बुकिंग कर रहे हैं, यानी सोना बेचकर नकदी हाथ में ले रहे हैं।
भारत के हिसाब से यहां सोने की मांग आभूषण और निवेश दोनों रूपों में रहती है। हालांकि ऊंचे दामों की वजह से गहनों की बिक्री पर थोड़ा असर पड़ा है, लेकिन गोल्ड ईटीएफ जैसे डिजिटल निवेश में अभी भी लोगों की दिलचस्पी बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि सोने की कीमतों का भविष्य काफी हद तक पश्चिम एशिया के हालात और कच्चे तेल की सप्लाई पर टिका है। अगर भविष्य में तेल की कीमतें स्थिर होती हैं और महंगाई का डर कम होता है, तब सोना फिर अपनी पुरानी चमक वापस पा सकता है। फिलहाल, विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सोना लंबी अवधि में हमेशा एक मजबूत संपत्ति साबित हुआ है।

