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डुमरी प्रखंड के खेतली पंचायत अंतर्गत पेरवाटोली गांव में गुरुवार को लीज खनन के प्रस्ताव को लेकर एक महत्वपूर्ण ग्राम सभा का आयोजन किया गया। इस ग्राम सभा में प्रखंड प्रशासन की ओर से संबंधित अधिकारी, जनप्रतिनिधि और खनन कार्य के इच्छुक ठेकेदार उपस्थित थे। सभा का उद्देश्य ग्रामीणों से खनन कार्य को लेकर सहमति प्राप्त करना था, लेकिन ग्रामीणों ने एक सुर में प्रस्तावित लीज खनन का कड़ा विरोध किया।
ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि जिस जमीन पर खनन का प्रस्ताव रखा गया है, वह उनकी पुश्तैनी जमीन है और उनके पूर्वजों की धरोहर रही है। इस जमीन से उनकी धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आस्था जुड़ी हुई है, जिसे किसी भी कीमत पर वे खनन के लिए नहीं देना चाहते।
गांववासियों का कहना है कि अगर इस क्षेत्र में खनन की अनुमति दी गई, तो इससे न केवल पर्यावरण को गंभीर नुकसान होगा, बल्कि आसपास की जलधाराएं, हरियाली, खेती और वन्य जीवों का अस्तित्व भी संकट में पड़ जाएगा। साथ ही गांव में प्रदूषण और विस्थापन जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
एक ग्रामीण बुजुर्ग ने ग्राम सभा में कहा, “यह जमीन हमारी पहचान है, हमारे पूर्वजों की धरोहर है। इसे हम पैसों या लालच में नहीं छोड़ सकते। विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति और संस्कृति की कीमत पर नहीं।”
ग्राम सभा में उपस्थित अधिकारियों ने ग्रामीणों की आपत्तियों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि उनकी राय को वरीय अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा तथा किसी भी निर्णय से पहले ग्रामीणों की सहमति आवश्यक मानी जाएगी।
ग्राम सभा में विरोध जताने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग उपस्थित थे। सभी ने सामूहिक रूप से आवाज़ उठाकर यह संदेश दिया कि पर्यावरण, संस्कृति और अधिकार की रक्षा के लिए वे एकजुट हैं।
संभावित निष्कर्ष:
यह मामला प्रशासन के लिए एक संवेदनशील विषय बन गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासनिक निर्णय ग्रामीणों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया जाता है या नहीं। फिलहाल पेरवाटोली गांव के लोग अपनी जमीन और पर्यावरण की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध नजर आ रहे हैं

