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World News: स्विट्जरलैंड के वैलैस कैंटन में बसा छोटा सा खूबसूरत गांव ब्लाटेन एक भयानक भूस्खलन की चपेट में आया। बर्च ग्लेशियर का एक हिस्सा अचानक ढह गया, इससे बर्फ, कीचड़ और विशाल चट्टानों का विशाल सैलाब पहाड़ से नीचे लुढ़कता हुआ गांव पर आ गिरा। इस आपदा ने गांव का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा मलबे में दबा दिया। ताजा वीडियो में साफ दिख रहा हैं कि ग्लेशियर टूटने से घाटी धूल के गुबार से भर गई। कीचड़ और पत्थरों की बाढ़ ने पहाड़ियों को निगल लिया और ब्लाटेन की गलियों मलबे के ढेर से पट गई।
गनीमत ये रही कि हादसे से पहले मई की शुरुआत में ही गांव के 300 लोगों को सुरक्षित निकाला गया था, क्योंकि ग्लेशियर के पीछे का पहाड़ पहले से ही कमजोर हो रहा था। भूस्खलन ने लोंजा नदी को भी रोक दिया, जिससे पानी रुककर एक बड़ी कृत्रिम झील बन गई। इससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा। वैलैस के सुरक्षा प्रमुख स्टीफन गैंजर ने कहा, यह एक भयंकर त्रासदी है। गांव का 90 प्रतिशत हिस्सा तबाह हो गया।
पास की रीड बस्ती निवासी 65 साल के वर्नर बेलवाल्ड का 1654 में बना पुश्तैनी लकड़ी का घर भी आपदा में बह गया। उन्होंने दुखी मन से कहा, ‘अब वहां कुछ नहीं बचा। ऐसा लगता है, मानो वहां कभी कोई बस्ती रही ही नहीं हो। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन इस त्रासदी की बड़ी वजह है। गर्मी बढ़ने से पर्माफ्रॉस्ट (हमेशा जमी रहने वाली मिट्टी और चट्टानें) पिघल रही है, जिससे चट्टानें ढीली हो रही हैं। इस हादसे में करीब 90 लाख मीट्रिक टन मलबा गांव पर गिरा, जिससे गांव को दोबारा बसाने में सालों लग सकते हैं।



