Dehradun: उत्तराखंड के इतिहास में आज का दिन बेहद खास है। राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) कानून लागू होने का एक वर्ष पूरा हो गया है, जिसे प्रदेश सरकार ‘समान नागरिक संहिता दिवस’ के रूप में मना रही है। इस अवसर पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने जनता को बधाई देते हुए कहा कि पीएम नरेन्द्र मोदी के विजन से उपजी यह पहल महिलाओं को उनके अधिकारों में पूर्ण समानता दिलाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

महिलाओं के अधिकारों पर विशेष जोर: सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि UCC का मूल उद्देश्य विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे मामलों में लैंगिक भेदभाव को समाप्त करना है। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में नागरिक सेवाओं और विवाह पंजीकरण में तेजी आई है। सरकार ने तकनीक का उपयोग करते हुए 23 भाषाओं में सहायता और AI-आधारित सपोर्ट सिस्टम शुरू किया है ताकि प्रदेश का हर नागरिक इस कानून का लाभ आसानी से उठा सके।

UCC में हुए महत्वपूर्ण संशोधन (अध्यादेश 2026)

एक वर्ष पूरे होने के साथ ही राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने UCC संशोधन अध्यादेश-2026 को मंजूरी दी है। इस नए संशोधन में कई कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं:

  • धोखाधड़ी पर कड़ाई: अब विवाह के समय पहचान छिपाना या गलत जानकारी देना विवाह निरस्त करने का ठोस आधार होगा।

  • लिव-इन संबंध: लिव-इन और विवाह में बल, दबाव या धोखाधड़ी करने वालों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं। साथ ही, अब लिव-इन संबंध खत्म होने पर पंजीयक (Registrar) की ओर से ‘समाप्ति प्रमाण पत्र’ जारी किया जाएगा।

  • शब्दावली में बदलाव: अनुसूची-2 में संवेदनशीलता दिखाते हुए ‘विधवा’ शब्द की जगह अब ‘जीवनसाथी’ शब्द का उपयोग किया जाएगा।

  • कानूनी अपडेट: अब पुराने कानूनों के स्थान पर ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)’ और ‘भारतीय न्याय संहिता (BNS)’ 2023 को लागू किया गया है।

सीएम धामी ने विश्वास जताया कि ये संशोधन कानून को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाएंगे। उत्तराखंड अब देश के अन्य राज्यों के लिए एक रोल मॉडल के रूप में उभर रहा है।

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