Washington (US): मिडिल ईस्ट में तनाव अब अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के शीर्ष नेतृत्व के बीच जुबानी जंग अब सैन्य टकराव में बदलती दिख रही है। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन ईरान के खिलाफ ‘निर्णायक’ सैन्य विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है। पेंटागन और व्हाइट हाउस ने ऐसी योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है, जिसका उद्देश्य ईरानी शासन का तख्तापलट करना हो सकता है।

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अदृश्य होकर आगे बढ़ रहा है अमेरिकी जंगी बेड़ा: रक्षा विशेषज्ञों की नजरें अमेरिकी जंगी बेड़े USS अब्राहम लिंकन पर टिकी हैं, जो शनिवार को मिडिल ईस्ट पहुंच सकता है। 18 जनवरी को मलक्का स्ट्रेट पार करने के बाद इस एयरक्राफ्ट कैरियर ने अपनी लोकेशन छिपाने के लिए ‘ऑटोमैटिक पहचान सिस्टम’ बंद कर दिया है। इसके साथ कई डिस्ट्रॉयर जहाज और परमाणु पनडुब्बियां भी चल रही हैं। इस कैरियर पर 60 के करीब F/A-18 फाइटर जेट्स तैनात हैं, जो ईरान के किसी भी शहर को पल भर में राख करने की क्षमता रखते हैं।

ईरान की पलटवार की चेतावनी: अमेरिकी गतिविधियों के जवाब में ईरान के सुप्रीम लीडर और सैन्य कमांडरों ने कड़ी चेतावनी जारी की है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मिडिल ईस्ट में स्थित सभी अमेरिकी मिलिट्री बेस और इजरायल के प्रमुख केंद्र उनकी मिसाइलों की रेंज में हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांडर ने कहा, “हमारी सेना की उंगली ट्रिगर पर है और हमारी मिसाइलें दुश्मन पर गरजने के आदेश का इंतजार कर रही हैं।”

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तुर्कमेनिस्तान में भी अमेरिकी हलचल: तनाव की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका का C37-B एयरक्राफ्ट ईरान के उत्तर में स्थित तुर्कमेनिस्तान के अशगाबाद बेस पर पहुंच चुका है। इसका मतलब है कि अमेरिका ने ईरान को चारों तरफ से घेरने की रणनीति तैयार कर ली है। ट्रम्प के इस कड़े रुख ने वैश्विक कूटनीति में खलबली मचा दी है, और दुनिया की नजरें अब अरब सागर की लहरों पर टिकी हैं, जहाँ से एक बड़ी सैन्य कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है।

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