India News: संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के हंगामे ने सदन की कार्यवाही को बाधित कर दिया है। शुक्रवार को एक बार फिर जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर विपक्षी दलों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके चलते सत्र को दोपहर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा।

इस हंगामे पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नाराजगी जताते हुए विपक्षी सांसदों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, “जनता ने जो अवसर आपको दिया है, उसे नारेबाजी और तख्तियों में बर्बाद न करें। प्रश्नकाल लोकतंत्र की आत्मा होता है, इसे बाधित करना जनआकांक्षाओं का अपमान है।”

ओम बिरला ने स्पष्ट कहा कि संसद में सवाल पूछना, बहस करना और जवाब लेना सांसदों का अधिकार है, लेकिन नारेबाजी और हंगामे से न केवल सदन की गरिमा को ठेस पहुंचती है, बल्कि अन्य सांसदों के अधिकार भी छीने जाते हैं। उन्होंने कहा, “आप इस सदन में जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने आए हैं। यह अवसर जनता का है, उसे खोने मत दीजिए।”

उन्होंने कुछ वरिष्ठ सदस्यों की ओर इशारा करते हुए यह भी कहा कि उनसे इस तरह के आचरण की उम्मीद नहीं थी। ओम बिरला ने सभी सांसदों से अपील की कि वे रचनात्मक बहस में हिस्सा लें और लोकतंत्र को मजबूत करें।

इस बार मानसून सत्र का आज 10वां दिन था, लेकिन अब तक केवल दो दिन ही प्रश्नकाल ठीक से चल पाया है। संसद में अब तक केवल “ऑपरेशन सिंदूर” और “मणिपुर में राष्ट्रपति शासन” जैसे मुद्दों पर ही विशेष चर्चा हो सकी है, बाकी समय हंगामे की भेंट चढ़ गया।

लोकसभा अध्यक्ष की यह सख्त चेतावनी अब यह संकेत देती है कि यदि विपक्ष इसी तरह चलता रहा, तो मानसून सत्र का शेष हिस्सा भी सिर्फ राजनीतिक प्रदर्शन का मंच बनकर रह जाएगा, जिससे देश और जनता दोनों को नुकसान होगा।

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