अपनी भाषा चुनेें :
World News: अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सक्रिय राजनीति में वापसी की कोशिशें तेज हो गई हैं, लेकिन इसके साथ ही अमेरिका की आत्मा और मूल विचारों को लेकर नई बहस भी छिड़ गई है। सोशल मीडिया पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का एक पुराना भाषण वायरल हो रहा है, जिसमें वे कहते हैं, “अमेरिका खून, नस्ल या सीमाओं से नहीं, बल्कि एक विचार से बना है — विविधता, सहयोग और अपनाने के विचार से।”
इस भाषण के संदर्भ में लोग ट्रंप की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं। ट्रंप यूरोपीय देशों पर आयात शुल्क थोप रहे हैं, इजरायल से दूरी बना रहे हैं और भारत जैसे देशों से नाराजगी जताते दिख रहे हैं। उनके दौर में ‘इमिग्रेंट’ शब्द एक खतरे की तरह पेश किया गया, जबकि कभी अमेरिका के दरवाजे पूरी दुनिया के सपने देखने वालों के लिए खुले थे।
ट्रंप का यह दावा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान को युद्ध से रोका, भी कई लोगों को ‘सौदेबाजी’ जैसा प्रतीत हुआ। विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह बयान कि “हमें सौदेबाज नहीं, सहयोगी चाहिए,” इसी दिशा में इशारा करता है।
हालांकि, भारत और अमेरिका के संबंध हाल के वर्षों में रणनीतिक रूप से मजबूत हुए हैं — रक्षा सौदों, तकनीक साझेदारी और द्विपक्षीय संबंधों के स्तर पर। मोदी और ट्रंप की केमिस्ट्री भी चर्चा में रही है, लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या ट्रंप की नीतियां उस अमेरिका की आत्मा के अनुरूप हैं, जिसे रोनाल्ड रीगन ने परिभाषित किया था?



