World News: उत्तरी अमेरिका के दो सबसे शक्तिशाली पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक जंग अब खुलकर सामने आ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को अपने नवनिर्मित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) में शामिल होने का दिया गया आमंत्रण वापस ले लिया है। इस फैसले ने दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ को और ज्यादा सख्त कर दिया है।

ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का ‘डिजिटल प्रहार’

डोनाल्ड ट्रंप ने हमेशा की तरह अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस फैसले की घोषणा की। उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को सीधे संबोधित करते हुए लिखा कि शांति बोर्ड ने कनाडा को भेजा गया निमंत्रण वापस लेने का निर्णय लिया है। हालांकि, ट्रंप ने इस पोस्ट में निमंत्रण रद्द करने की कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई है।

विवाद की जड़: “अमेरिका की वजह से जिंदा है कनाडा”

इस तनातनी की शुरुआत दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान हुई, जब ट्रंप ने विवादास्पद दावा किया कि “कनाडा अमेरिका की वजह से ही अस्तित्व में है।” कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस बयान को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “कनाडा और अमेरिका की साझेदारी शानदार है, लेकिन कनाडा इसलिए आगे बढ़ रहा है क्योंकि हम कनाडाई हैं, न कि अमेरिका की वजह से।” माना जा रहा है कि कार्नी के इसी तेवर से नाराज होकर ट्रंप ने न्यौता वापस लिया है।

क्या है ‘बोर्ड ऑफ पीस’ और कौन-कौन हैं शामिल?

विश्व में शांति स्थापित करने के ट्रंप के इस विजन में दुनिया के करीब 60 देशों को न्योता भेजा गया था, जिनमें से 25 देशों ने अब तक अपनी सहमति दे दी है। इनमें पाकिस्तान, इजरायल, सऊदी अरब, तुर्किए, यूएई और मिस्र जैसे प्रमुख देश शामिल हैं। भारत को भी इस बोर्ड में शामिल होने का न्यौता मिला है, जिस पर विदेश मंत्रालय फिलहाल विचार कर रहा है।

1 बिलियन डॉलर की भारी शर्त

खबरों के अनुसार, इस बोर्ड के सदस्य देशों का कार्यकाल 3 साल का होगा। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि स्थायी सदस्यता हासिल करने के लिए देशों को कथित तौर पर 1 बिलियन डॉलर का भुगतान करना होगा। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और चीन जैसे कई बड़े देशों ने फिलहाल इस पूरी प्रक्रिया से दूरी बना रखी है।

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