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Astrology News: माघ मास के पावन दिनों में त्योहारों और व्रतों की झड़ी लगी हुई है। षटतिला एकादशी के ठीक अगले दिन मनाई जाने वाली ‘तिल द्वादशी’ आध्यात्मिक और शारीरिक शुद्धि के लिए सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक मानी जाती है। हां, हिंदू धर्म शास्त्रों में इस दिन तिल के उपयोग को अश्वमेध यज्ञ के समान फलदायी बताया गया है। आज के दिन किया गया तिल का दान न केवल पुण्य देता है, बल्कि व्यक्ति को कई जन्मों के गंभीर रोगों से भी मुक्ति दिलाता है।
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पंचांग का गणित और शुभ मुहूर्त
ज्योतिष गणना के अनुसार, द्वादशी तिथि आज रात 8:16 बजे तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी की शुरुआत हो जाएगी। आज चंद्रमा पूरे दिन वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे और ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। जो लोग आज शुभ कार्य करना चाहते हैं, उन्हें राहुकाल का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आज दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से 3 बजकर 8 मिनट तक राहुकाल रहेगा, इस दौरान किसी भी नए काम की शुरुआत से बचना चाहिए।
क्यों कहा जाता है इसे तिल द्वादशी?
भविष्य पुराण के मुताबिक, जब द्वादशी तिथि के साथ मूल या पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का संयोग बनता है, तो वह ‘तिल द्वादशी’ कहलाती है। इस दिन भगवान विष्णु के ‘कूर्म अवतार’ (कछुआ अवतार) की पूजा का भी विशेष विधान है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस दिन तिल से बने व्यंजनों का भोग लगाते हैं और ब्राह्मणों को तिल का दान करते हैं, वे सदा निरोगी और दीर्घायु रहते हैं।
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तिल के दान से मिटेंगे पाप
इस व्रत का महत्व बताते हुए कहा गया है कि तिल दान करने से व्यक्ति को शारीरिक कष्टों, जैसे आंखों की कमजोरी या चर्म रोगों से छुटकारा मिलता है। हां, आज के दिन तिल मिश्रित जल से स्नान करना और तिल के लड्डू का प्रसाद बांटना बेहद कल्याणकारी माना जाता है। अगर आप भी सुख-समृद्धि की कामना रखते हैं, तो आज के दिन श्रद्धापूर्वक नारायण की पूजा करें और तिल का दान अवश्य करें।
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