Bokaro News: बोकारो के उत्तरी क्षेत्र के ग्रामीणों ने शुक्रवार को अपना गुस्सा खुलकर जाहिर किया। करीब 60 साल से पंचायत व्यवस्था से वंचित इन गांवों के लोगों ने उपायुक्त कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय धरना दिया और प्रशासन से न्याय की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे और इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

धरना स्थल पर ग्रामीणों ने बताया कि लगभग छह दशक पहले 49 मौजा की जमीन चौथे इस्पात कारखाना निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई थी। इनमें से 29 मौजा पर बोकारो इस्पात संयंत्र और सेक्टर बसाए गए, जबकि 13 मौजा को वर्ष 2010 में पंचायती राज व्यवस्था में शामिल कर दिया गया। लेकिन आज भी सात मौजा—कुण्डौरी, शिबुटांड़, पंचौरा, महेशपुर, कन्फट्टा, बैधमारा और महुआर—पंचायत व्यवस्था से बाहर हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि इन गांवों में लाखों लोग रहते हैं, वे विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अपने प्रतिनिधि चुनते हैं, लेकिन पंचायत का अधिकार उनसे छीन लिया गया है। इस वजह से यहां के लोग सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य केंद्र और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। सरकारी योजनाओं जैसे आवास योजना, शौचालय निर्माण, छात्रवृत्ति और ऋण सुविधा का लाभ भी उन्हें नहीं मिल पा रहा।

ग्रामीणों की मुख्य मांगें

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिग्रहित जमीन का पूरा मुआवजा उन्हें आज तक नहीं मिला। न ही पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था की गई। इसके उलट बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL) अब उन्हीं जमीनों को निजी कंपनियों और व्यक्तियों को बेचकर मुनाफा कमा रहा है। इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश पनप गया है।

धरना स्थल पर ग्रामीणों ने अपनी मुख्य मांगें साफ शब्दों में रखीं। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित 6 पंचायतों को तत्काल अधिसूचना और गजट प्रकाशित कर पंचायती राज व्यवस्था में शामिल किया जाए। साथ ही ग्रामीण रैयतों के नाम से लगान रसीद काटने का आदेश जारी हो और भूमि अधिग्रहण व बंदरबांट की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अब वे और इंतजार नहीं करेंगे, क्योंकि 60 साल लंबा वक्त बीत चुका है और उनकी पीढ़ियां बिना पंचायत और बिना सुविधा के जीवन गुजार रही हैं।

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