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झारखंड विधानसभा में बालू संकट पर घमासान, सत्ता पक्ष–विपक्ष में तीखी बहस

Ranchi : झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को बालू संकट को लेकर सदन का माहौल गर्म रहा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर जमकर बहस हुई। भाजपा विधायक कुशवाहा शशिभूषण मेहता ने अल्पसूचित प्रश्न के माध्यम से पलामू

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Ranchi : झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को बालू संकट को लेकर सदन का माहौल गर्म रहा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर जमकर बहस हुई। भाजपा विधायक कुशवाहा शशिभूषण मेहता ने अल्पसूचित प्रश्न के माध्यम से पलामू जिले में बालू की किल्लत का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बालू के कारोबार को थाना स्तर पर “मैनेज” किया जा रहा है, जिससे आम लोगों को मजबूरी में दूसरे राज्यों से महंगे दामों पर बालू मंगाना पड़ रहा है।

इस पर जवाब देते हुए विभागीय मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि झारखंड उच्च न्यायालय के निर्देश और पेसा कानून की औपचारिक घोषणा तक बालू घाटों से बालू उठाव पर रोक लगाई गई है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद सरकार ने जनहित में विशेष व्यवस्था करते हुए राज्य के 374 बालू घाटों से 100 रुपये प्रति सीएफटी की दर से बालू उपलब्ध कराने की पहल की है, जिनमें से 71 घाट पलामू जिले में हैं।

हालांकि विपक्ष ने सरकार के दावों पर सवाल खड़े किए। भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने पूरे राज्य में अवैध बालू उत्खनन का आरोप लगाया और कहा कि कहीं भी 100 रुपये प्रति सीएफटी की दर से बालू वास्तव में उपलब्ध नहीं है। वहीं, कुशवाहा शशिभूषण मेहता ने पलामू जिले के 71 बालू घाटों की पूरी सूची सदन में उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने जेएसएमडीसी के माध्यम से एमडीओ (माइन डेवलपर ऑपरेटर) के चयन में कम दरों पर प्रक्रिया होने से राज्य को भारी राजस्व नुकसान होने की आशंका भी जताई।

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