India News: विजयादशमी के अवसर पर मुंबई की राजनीति का सबसे बड़ा शो—दशहरा रैली—इस बार बेहद विवादों और आरोप-प्रत्यारोपों का केंद्र बन गई। 2 अक्टूबर को हुई इस रैली में एक ओर उद्धव ठाकरे ने दादर के शिवाजी पार्क में अपनी परंपरागत रैली की, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट की रैली गोरेगांव के नेस्को सेंटर में आयोजित की गई। दोनों नेताओं ने अपने-अपने मंच से एक-दूसरे पर करारे प्रहार किए, साथ ही भाजपा और महायुति गठबंधन के मुद्दों को लेकर तीखी बहस छेड़ दी।
शिंदे ने साधा उद्धव पर निशाना
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने भाषण में उद्धव ठाकरे को खुलकर चुनौती दी। उन्होंने कहा कि उद्धव पाकिस्तान में जाकर रैली करें और वहाँ आसिफ मुनीर को आमंत्रित करें, क्योंकि ठाकरे के बयान पाकिस्तान में सुर्खियाँ बनते हैं। शिंदे ने आरोप लगाया कि उद्धव राहुल गांधी की गोद में बैठकर देशद्रोही भाषा बोलने वालों का समर्थन करते हैं। शिंदे ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने कई रुकी परियोजनाओं को चालू किया है। नवी मुंबई एयरपोर्ट, मेट्रो 3, और अन्य अधूरी पहल अब पूर्णता की ओर बढ़ रही हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा—“मैं वह नहीं जो वैनिटी वैन में घूमे और फेसबुक लाइव से राजनीति करे।” शिंदे ने शिवसैनिकों की सेवा भावना को दिखाने वाला वीडियो भी पेश किया और कहा कि हर संकट में शिवसेना जनता के साथ खड़ी है।
महायुति की जीत पर जोर
शिंदे ने अपने संबोधन में स्थानीय निकाय चुनावों पर भी फोकस किया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत से लेकर मुंबई महानगरपालिका तक भगवा लहराना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि महायुति हार गई तो मुंबई 25 साल पीछे चली जाएगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से मतभेद भुलाकर एकजुट होकर काम करने की अपील की।
उद्धव का पलटवार – “जो चुराया गया वह पीतल था”
दूसरी ओर उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण की शुरुआत में ही पार्टी विभाजन के दर्द को सामने रखा। उन्होंने शिंदे और भाजपा गठबंधन पर हमला करते हुए कहा—“जो चुराया गया वह पीतल था, मेरे पास सोना है।” उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वे मुंबई में हुए विकास कार्यों का गलत श्रेय ले रही है। उद्धव ने दावा किया कि कोस्टल रोड, वर्ली के बीडीडी चॉल पुनर्विकास और नाइटलाइफ़ जैसी योजनाएँ उनकी पहल थीं।
भाजपा पर हिंदू-मुस्लिम राजनीति का आरोप
ठाकरे ने सवाल उठाया कि भाजपा सिर्फ हिंदू-मुस्लिम विवाद भड़काकर मनपा चुनाव जीतना चाहती है। उन्होंने कहा कि अगर इतनी ही हिम्मत है तो अपने झंडे से हरा रंग हटा दें। उन्होंने भाजपा को “अमीबा” बताया जो बेकाबू होकर फैलता है। ठाकरे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और मुस्लिम नेताओं की मीटिंग को लेकर भाजपा की आलोचना की और पूछा, “क्या हिंदुत्व छोड़ दिया गया है?”
किसानों और महंगाई के मुद्दे
ठाकरे ने अपने भाषण में किसानों की समस्या प्रमुखता से उठाई। उन्होंने कहा कि राज्य में बारिश से बर्बाद हुए किसानों को तत्काल प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये देने चाहिए। उन्होंने मुंबई मनपा में जमा फंड पर भी सवाल उठाया और पूछा कि आखिर यह पैसा कहाँ गया, क्या यह लंदन भेजा गया? उनका आरोप था कि भाजपा की सरकार आम जनता से जुड़ी समस्याओं पर काम करने के बजाय चुनावी राजनीति पर केंद्रित है।
मोदी सरकार पर सीधा हमला
उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री मोदी पर भी सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव से पहले जनता के खातों में पैसा डाला गया, लेकिन महाराष्ट्र के किसानों की मदद के लिए फंड नहीं है। उन्होंने मणिपुर हिंसा और लद्दाख में सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की। ठाकरे ने कहा कि मोदी सरकार “जन सुरक्षा कानून” जैसे क़ानून बनाकर लोकतंत्र को कमजोर कर रही है।
दशहरा की रैली बनी चुनावी जंग
मुंबई की यह दशहरा रैली केवल धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति की सबसे अहम लड़ाई का मंच साबित हुई।
उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे दोनों ने इस अवसर का इस्तेमाल मनपा चुनावों को ध्यान में रखकर अपनी ताक़त दिखाने और विपक्ष पर आरोप लगाने में किया। जहाँ एक ओर शिंदे ने खुद को “काम करने वाला नेता” बताया, वहीं उद्धव ठाकरे ने खुद को असली “हिंदुत्व और विकास की धारा” का वाहक बताया। दोनों नेताओं की तीखी जंग ने साफ संकेत दिया कि आगामी स्थानीय चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति का चेहरा बदल सकते हैं।



