India News: तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी साझा करने के मामले में फंसी दो महिला पत्रकारों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इन पत्रकारों ने शीर्ष अदालत से तत्काल अंतरिम राहत की मांग करते हुए कहा कि पुलिस की कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।

मामले की सुनवाई शुक्रवार को करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सहमति जताई है। बताया जा रहा है कि दोनों पत्रकारों को मार्च 2025 में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसी महीने मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी।

राज्य सरकार ने दी चुनौती

इसके बाद तेलंगाना सरकार ने इस जमानत आदेश को सत्र न्यायालय में चुनौती दी। अब सात महीने बाद सत्र न्यायालय ने राज्य सरकार की दलील मानते हुए दोनों पत्रकारों को पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दे दिया।

पत्रकारों ने इस आदेश के खिलाफ तेलंगाना हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन सोमवार को हाईकोर्ट ने भी सत्र अदालत के फैसले को बरकरार रखा। इस आदेश ने पत्रकारों की गिरफ्तारी का रास्ता खोल दिया, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल

याचिका में दोनों ने दलील दी है कि उनके खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का नतीजा है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर राय व्यक्त करना किसी अपराध के समान नहीं माना जा सकता। संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, जिसका उल्लंघन हो रहा है।

पत्रकारों ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह निचली अदालतों के आदेशों पर रोक लगाए और गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान करे। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि पत्रकारों की राय को अपराध ठहराया गया तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक उदाहरण बनेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट का फैसला न केवल इन पत्रकारों के लिए, बल्कि सोशल मीडिया अभिव्यक्ति की सीमा तय करने वाले भविष्य के मामलों के लिए भी अहम होगा।

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