अपनी भाषा चुनेें :
Interesting News: 2024 की मई की एक रात विज्ञान जगत के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी। 10 और 11 मई को आए सुपरस्टॉर्म गान्नोन ने पृथ्वी की मैग्नेटिक ढाल को इस कदर हिला दिया कि शोधकर्ता भी हैरान रह गए। इस तूफान की ताकत इतनी ज्यादा थी कि पृथ्वी का प्लाज्मास्फीयर अपने असली आकार के सिर्फ एक-पांचवें हिस्से तक सिमट गया।
प्लाज्मास्फीयर का रिकॉर्ड तोड़ सिकुड़ना
अरासे सैटेलाइट, जो जापान की जाक्सा एजेंसी ने 2016 में लॉन्च किया था, उस वक्त तूफान की सीधी लाइन में मौजूद था। इसके डेटा ने दुनिया को हिला दिया- जहां प्लाज्मास्फीयर सामान्य दिनों में लगभग 44,000 किलोमीटर तक फैला रहता है, वहीं सुपरस्टॉर्म गान्नोन के दौरान यह गिरकर सिर्फ 9,600 किलोमीटर रह गया। इतनी तेज और गहरी गिरावट पहले कभी रिकॉर्ड नहीं हुई थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सब सूरज पर हुए विशाल विस्फोट के कारण हुआ। अरबों टन आवेशित कण सीधे पृथ्वी की ओर आए और मैग्नेटोस्फीयर पर “थंडर स्ट्राइक” जैसा असर हुआ।
ऑरोरा मध्य भारत तक देखे जाने का दुर्लभ मामला
इस सुपरस्टॉर्म की ताकत का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि सामान्यतः केवल ध्रुवों पर दिखाई देने वाली ऑरोरा रोशनी मेक्सिको, जापान और यूरोप के दक्षिणी हिस्सों तक पहुंच गई। यह अपने आप में एक ऐतिहासिक घटना थी और इसने वैज्ञानिकों को साफ संकेत दिया कि तूफान कितना गहरा था।
रिकवरी में चार दिन, वैज्ञानिकों ने कहा- पहली बार ऐसा देखा
आमतौर पर सुपरस्टॉर्म खत्म होने पर प्लाज्मास्फीयर जल्दी रिकवर हो जाता है। लेकिन इस बार नेगेटिव स्टॉर्म की स्थिति बनी- आयनमंडल ने कणों की आपूर्ति अचानक कम कर दी और प्लाज्मास्फीयर भरने में चार दिन लग गए। अरासे ने अपने सात साल के अवलोकन में इतना धीमा सुधार कभी नहीं देखा था।
धरती की तकनीक पर पड़ा सीधा असर
तूफान का असर सिर्फ ऊपर आसमान में नहीं, नीचे धरती की तकनीक पर भी महसूस हुआ। कई सैटेलाइट्स में पावर फेलियर की समस्या आई, GPS की सटीकता Bigड़ गई और हाई-फ्रीक्वेंसी कम्युनिकेशन लगभग ठप हो गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इससे भी बड़ा तूफान आया, तो विमान, इंटरनेट, नेविगेशन और सैन्य संचार कुछ घंटों में ढह सकता है।
यह पूरा घटना-क्रम अब स्पेस वेदर फोरकास्टिंग के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है। वैज्ञानिकों के पास अब वह डेटा है जिसकी उन्हें वर्षों से तलाश थी।

