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Lifestyle Desk: आयुर्वेद के अनुसार बालों का स्वास्थ्य केवल बाहरी देखभाल पर निर्भर नहीं करता, बल्कि यह शरीर के आंतरिक संतुलन, पोषण और जीवनशैली का भी परिणाम होता है। इसलिए प्राकृतिक उपायों को अपनाकर बालों को जड़ों से मजबूत किया जा सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी-बूटियां हैं, जिनसे बने तेल बालों को गहराई से पोषण देते हैं। एक आसान घरेलू उपाय में आंवला चूर्ण, कड़ी पत्ता, नारियल तेल और मेथी दाना को धीमी आंच पर पकाकर तेल तैयार किया जाता है। जब तेल का रंग हल्का बदलने लगे और उसमें सुगंध आने लगे, तब इसे छानकर कांच के बर्तन में रख लिया जाता है। यह मिश्रण बालों को पोषण देने, उनकी चमक बनाए रखने, रूसी कम करने और बालों को मुलायम बनाने में मदद करता है। इस तेल का उपयोग सप्ताह में दो बार करना लाभकारी माना जाता है।
इसके अलावा एक अन्य आयुर्वेदिक तेल भी काफी प्रभावी माना जाता है, जिसमें आंवला चूर्ण के साथ भृंगराज, ब्राह्मी, जटामांसी चूर्ण और तिल के तेल को मिलाकर धीमी आंच पर पकाया जाता है। यह तेल बालों के झड़ने को नियंत्रित करने, स्कैल्प की गंदगी को साफ करने और समय से पहले बाल सफेद होने की समस्या को कम करने में मदद करता है। साथ ही, इसमें मौजूद जड़ी-बूटियां मानसिक तनाव को कम करने में भी सहायक होती हैं, जो बालों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं। इस तेल को सप्ताह में दो से तीन बार हल्का गुनगुना करके बालों की जड़ों में लगाना चाहिए।
यदि किसी की स्कैल्प ऑयली है, तो तेल लगाने के बाद बालों को अच्छे शैम्पू से धो लेना जरूरी होता है, ताकि अतिरिक्त तेल जमा न हो। नियमित उपयोग से कुछ ही महीनों में बालों की गुणवत्ता में सुधार देखा जा सकता है और बाल मजबूत, घने व चमकदार बनते हैं। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि बाहरी देखभाल के साथ शरीर को अंदर से स्वस्थ रखना भी जरूरी है। पर्याप्त पानी पीना, संतुलित आहार लेना और ओमेगा-3 फैटी एसिड व विटामिन-ई से भरपूर भोजन शामिल करना बालों को मजबूती देता है। आयुर्वेदिक उपायों और संतुलित जीवनशैली के जरिए गर्मियों में भी बालों को स्वस्थ और आकर्षक बनाए रखा जा सकता है। मालूम हो कि गर्मियों की शुरुआत के साथ ही मौसम में बढ़ती उमस और पसीना बालों की सेहत पर नकारात्मक असर डालने लगता है। इस दौरान बाल चिपचिपे हो जाते हैं, जल्दी गंदे दिखते हैं और झड़ने की समस्या भी बढ़ जाती है। ऐसे में बालों की सही देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है।
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