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World News: स्पेन के रियल सिउदाद एयरपोर्ट की कहानी किसी फिल्म जैसी लगती है, लेकिन यह पूरी तरह असली है। 2009 में बड़े सपनों और भारी निवेश के साथ खुला यह एयरपोर्ट यूरोप का सबसे आधुनिक और विशाल इंटरनेशनल हवाई हब बनने वाला था। इसकी रनवे यूरोप की सबसे लंबी—4.1 किलोमीटर—मानी जाती थी और टर्मिनल की क्षमता सालाना 1 करोड़ यात्रियों को संभालने की थी। लेकिन इन सब खूबियों के बाद भी हवाई अड्डा अपनी ही महत्वाकांक्षाओं के बोझ तले दब गया।
गलत लोकेशन ने तोड़ी कमर
एयरपोर्ट मैड्रिड से करीब 200 किलोमीटर दूर बनाया गया था। आम यात्रियों के लिए इतनी दूरी तय करके फ्लाइट पकड़ना आसान नहीं था, चाहे टिकट कितनी भी सस्ती क्यों न हों। सरकार ने वादा किया था कि हाई-स्पीड रेल स्टेशन बनाया जाएगा, जिससे लोग एक घंटे में एयरपोर्ट पहुंच सकें। लेकिन स्टेशन कभी बना ही नहीं। परिणाम यह हुआ कि शुरू में जो कुछ एयरलाइंस यहां से उड़ान भर रही थीं, वे भी धीरे-धीरे पीछे हटने लगीं। 2011 तक अंतिम एयरलाइन ने भी सेवाएं बंद कर दीं। एयरपोर्ट खाली पड़ा रहने लगा।
कर्ज में डूबा एयरपोर्ट, मजबूर होकर बंद करना पड़ा
जब यात्री नहीं थे, तो आय भी नहीं थी। संचालन खर्च बढ़ता गया और एयरपोर्ट चलाने वाली कंपनी पर 300 मिलियन यूरो (करीब 2,700 करोड़ रुपये) से ज्यादा का कर्ज चढ़ गया। आखिरकार 2012 में एयरपोर्ट को बंद करना पड़ा। दुनिया के सबसे बड़े ‘फेल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स’ में यह नाम दर्ज हो गया।
बेचने में भी हुई बड़ी फजीहत
एयरपोर्ट को बेचने के लिए शुरुआती कीमत 100 मिलियन यूरो रखी गई थी। लेकिन कोई खरीददार मिला ही नहीं। एक समय तो स्थिति इतनी खराब हो गई कि एक चीनी समूह ने सिर्फ 10,000 यूरो—यानी लगभग 9 लाख रुपये—की बोली लगा दी। यह बोली पूरी दुनिया में मजाक का विषय बन गई और स्पेन को भारी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी।
आखिरकार सस्ते में हुआ सौदा, बदला इस्तेमाल
कई साल बाद 2018 में यह एयरपोर्ट सिर्फ 56 मिलियन यूरो में बेचा गया—अपनी असली लागत के मुकाबले बेहद कम दाम में। 2019 में इसे दोबारा खोला गया, लेकिन यह अब यात्री उड़ानों का केंद्र नहीं है। यह एक स्टोरेज, मेंटेनेंस और पुराने विमानों को खत्म करने वाला हब बन चुका है। कोविड के दौरान कई ग्राउंडेड प्लेन यहां महीनों तक पार्क किए गए थे।
कभी यूरोप का बड़ा इंटरनेशनल हब बनने का सपना देखने वाला यह एयरपोर्ट आज एक चेतावनी की तरह खड़ा है—कि सिर्फ भव्यता और सपनों से प्रोजेक्ट सफल नहीं होते, व्यवहारिकता भी जरूरी होती है।

