Prayagraj: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिग बच्चों के कथित यौन शोषण के मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। यह कार्रवाई प्रयागराज की विशेष पॉक्सो अदालत के कड़े निर्देश के बाद की गई है। झूंसी थाने में दर्ज इस मुकदमे में शंकराचार्य के अलावा उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और 2-3 अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है।

थाना प्रभारी महेश मिश्रा के अनुसार, अदालत का आदेश मिलते ही शनिवार देर रात संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। विशेष कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा था कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, इसलिए साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिसिया जांच अनिवार्य है। साथ ही, अदालत ने जांच को निष्पक्ष रखने और पीड़ितों की पहचान गुप्त रखने के सख्त निर्देश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य बताए जाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी ने 8 फरवरी को विशेष पॉक्सो कोर्ट में याचिका दायर की। आरोप है कि माघ मेला और महाकुंभ के दौरान आयोजित शिविर में गुरुकुल की आड़ लेकर दो नाबालिगों का उत्पीड़न किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि विरोध करने पर बच्चों को डराया-धमकाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने दो नाबालिगों के बयान कैमरे के सामने दर्ज किए, जिसके बाद एफआईआर का आदेश जारी हुआ।

शंकराचार्य ने दी सफाई

एफआईआर दर्ज होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह एक बनावटी मामला है और शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी पहले भी झूठे मुकदमे दर्ज कराने के आरोपी रहे हैं। शंकराचार्य के अनुसार, यह पूरा प्रकरण वैचारिक मतभेदों और आपसी रंजिश का नतीजा है। उन्होंने यह भी कहा कि वे न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हैं और जांच में पूरा सहयोग करेंगे ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके।

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