Damascus, (Syria): मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) की राजनीति में एक दशक पुराना समीकरण अब पूरी तरह बदल गया है। सीरिया, जो कभी ईरान का सबसे मजबूत सैन्य ठिकाना माना जाता था, अब सऊदी अरब के आर्थिक प्रभाव में आता दिख रहा है। बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद बनी नई व्यवस्था के बीच शनिवार को सऊदी अरब और सीरिया ने ऐतिहासिक निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसने ईरान के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
हवाई मार्ग से लेकर डिजिटल क्रांति तक
सीरियाई निवेश प्राधिकरण के अनुसार, इस साझेदारी का सबसे बड़ा हिस्सा एक नई संयुक्त सीरिया-सऊदी एयरलाइन की स्थापना है। इसके अलावा:
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अलेप्पो में नया एयरपोर्ट: रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर अलेप्पो में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण और पुराने का आधुनिकीकरण किया जाएगा।
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$1 अरब का सिल्कलिंक प्रोजेक्ट: सीरिया के दूरसंचार (Telecommunications) ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए सऊदी अरब एक अरब डॉलर का निवेश करेगा।
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पानी और बुनियादी ढांचा: समुद्री जल को पीने योग्य बनाने (डीसैलिनेशन) और अन्य विकास कार्यों के लिए भी कई करारों पर मुहर लगी है।
ईरान की घटती पकड़ और नया अंतरराष्ट्रीय गुट
दशकों तक अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और युद्ध की मार झेलने वाले सीरिया के लिए यह निवेश किसी ‘संजीवनी’ जैसा है। अमेरिका द्वारा अधिकांश प्रतिबंध हटाने के बाद नई सरकार का झुकाव अब वाशिंगटन और खाड़ी देशों की ओर बढ़ रहा है। सऊदी अरब के निवेश मंत्री खालिद अल-फालिह ने इसे एक रणनीतिक साझेदारी बताते हुए ‘विशेष निवेश फंड’ की घोषणा की है।
पुनर्निर्माण की होड़: केवल सऊदी नहीं, अमेरिका की भी एंट्री
सीरिया में निवेश की यह रेस केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं है। इसी सप्ताह सीरिया ने अमेरिकी ऊर्जा दिग्गज शेवरॉन (Chevron) और कतर की कंपनियों के साथ तेल और गैस की खोज के लिए हाथ मिलाया है। पिछले कुछ महीनों में सीरिया ने 14 अरब डॉलर से अधिक के करार हासिल किए हैं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सीरिया अब ईरान के ‘प्रभाव क्षेत्र’ से बाहर निकलकर एक नए अंतरराष्ट्रीय गुट का हिस्सा बन रहा है।
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