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Jamshedpur News: जमशेदपुर में आयोजित चतुर्थ बाल मेला की समीक्षा सोमवार को बिष्टुपुर स्थित विधायक सरयू राय के कार्यालय में की गई। बैठक में मेला संचालन से जुड़े कई सदस्य मौजूद रहे। सभी ने अपने-अपने अनुभव साझा किए और बताया कि बच्चों के लिए झूले, मनोरंजन के साधन और बच्चों की जरूरतों से जुड़ी सामग्री के स्टॉल अगर और बढ़ाए जाएं, तो मेला और आकर्षक बन सकता है।
कई सदस्यों ने बताया कि इस बार स्लम इलाकों के बच्चों को जोड़ना बेहद प्रभावी कदम था, जिसे आगे और बेहतर तरीके से विस्तार दिया जा सकता है।
सरयू राय ने क्या कहा
बैठक की अध्यक्षता करते हुए सरयू राय ने साफ कहा कि मेला जनता और कार्यकर्ताओं की मेहनत से सफल हुआ है, लेकिन सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है। उन्होंने कहा कि “बाल मेला सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सेवा का काम है। सेवा भाव ही इसे सफल बनाता है।”
राय ने राज्य के वित्त मंत्री द्वारा बाल बजट को दोगुना करने के फैसले का स्वागत किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह धनराशि सिर्फ और सिर्फ बच्चों की जरूरतों पर ही खर्च होनी चाहिए।
उनका कहना था कि कुपोषण, जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य और बाल कल्याण पर ध्यान दिए बिना मजबूत भविष्य की कल्पना असंभव है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि समाज के संस्कारवान और मेधावी युवाओं को बाल कल्याण कार्यक्रमों से जोड़ा जाए।
स्लम क्षेत्रों के बच्चों को अवसर देने की बात
राय ने यह भी कहा कि स्लम के बच्चों को मेले से जोड़ना अच्छी पहल है, लेकिन यह कोशिश सिर्फ एक दिन की खुशी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन बच्चों को शिक्षा और मदद देने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा—“अगर कोई बच्चा स्कूल नहीं जा पा रहा है, तो हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम उसे रास्ता दिखाएं।”
सम्मान और समापन
बैठक में गोविंद दोदराजका, शिवशंकर सिंह, आशुतोष राय, मंजू सिंह, अमृता मिश्रा सहित कई सदस्यों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन आशुतोष राय ने किया।

