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नई दिल्ली | एजेंसी
देश की राजधानी में एक बड़े राजनीतिक उलटफेर के तहत आम आदमी पार्टी (आप) के 7 राज्यसभा सांसदों ने औपचारिक रूप से भाजपा का दामन थाम लिया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को इन सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए विपक्षी ‘इंडिया ब्लॉक’ पर तीखा हमला बोला। राज्यसभा द्वारा जारी नई सूची के अनुसार, अब राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी भाजपा संसदीय दल के सदस्य बन गए हैं।
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इस बड़े दलबदल के बाद उच्च सदन (राज्यसभा) में भाजपा का संख्या बल 107 से बढ़कर 113 हो गया है, जबकि आम आदमी पार्टी के पास अब केवल तीन सदस्य (संजय सिंह, नारायण दास गुप्ता और संत बलबीर सिंह) ही रह गए हैं। किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस बदलाव की पुष्टि करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र निर्माण के लिए इन सांसदों का एनडीए में स्वागत है। उन्होंने इन नेताओं के पिछले संसदीय आचरण की सराहना करते हुए कहा कि इन्होंने कभी सदन में अपशब्दों या अनुशासनहीनता का प्रदर्शन नहीं किया।
कानूनी दांवपेंच की बात करें तो, इन सांसदों ने अयोग्यता से बचने के लिए संविधान की दसवीं अनुसूची के ‘विलय’ (Merger) नियम का सहारा लिया है। 1985 के 52वें संशोधन के अनुसार, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई निर्वाचित सदस्य किसी दूसरी पार्टी में विलय के लिए सहमत होते हैं, तो उन पर दलबदल कानून के तहत अयोग्यता लागू नहीं होती। चूंकि आम आदमी पार्टी के कुल 10 सांसदों में से 7 (दो-तिहाई से अधिक) ने एक साथ भाजपा में शामिल होने का फैसला किया, इसलिए उनकी सदस्यता सुरक्षित बनी रहेगी।
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मंत्री रिजिजू ने विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधते हुए इसे ‘टुकड़े-टुकड़े इंडिया ब्लॉक’ करार दिया और कहा कि राष्ट्रहित में इन सांसदों का सही दिशा में आना सराहनीय कदम है। इस घटनाक्रम ने दिल्ली की राजनीति के साथ-साथ राज्यसभा के समीकरणों को भी पूरी तरह बदल कर रख दिया है।
सदन में आचरण और भाजपा की मजबूती: किरेन रिजिजू
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू का कहना है कि इन 7 सांसदों के आने से राज्यसभा में भाजपा की उपस्थिति और भी मजबूत हुई है। उन्होंने विशेष रूप से जोर देकर कहा कि इन सदस्यों ने हमेशा संसदीय मर्यादा का पालन किया है। भाजपा का मानना है कि इन अनुभवी चेहरों के जुड़ने से न केवल पार्टी का विस्तार होगा, बल्कि सदन के भीतर विधायी कार्यों में भी अधिक प्रभावी समन्वय देखने को मिलेगा।

