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Jaipur: राजस्थान में बढ़ते वायु प्रदूषण ने अब प्रदेशवासियों की सेहत और उम्र पर सीधा हमला बोल दिया है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (CSE) की हालिया ‘स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरमेंट-2026’ रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर के नागरिक अपनी औसत उम्र के करीब 3 साल 10 महीने और 24 दिन सिर्फ जहरीली हवा के कारण खो रहे हैं। आलम यह है कि जयपुर के लोगों को साल भर में औसतन 20 दिन भी पूरी तरह शुद्ध हवा नसीब नहीं हो रही है।
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आंकड़ों पर गौर करें तो 1 जनवरी 2021 से 31 मार्च 2025 के बीच के 1,550 दिनों में से लगभग 450 दिन एक्यूआई (AQI) ‘खराब’ से ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहा। इसका मतलब है कि जयपुर का हर तीसरा दिन प्रदूषण के उस खतरनाक स्तर पर था, जो दिल और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों को दावत देता है। पूरे साढ़े चार साल के अंतराल में केवल 81 दिन ही ऐसे थे, जब हवा की गुणवत्ता ‘अच्छी’ श्रेणी में दर्ज की गई।
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रिपोर्ट से पता चलता है कि यह जहरीली हवा केवल फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि दिमाग की नसों और किडनी को भी छलनी कर रही है। हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM 2.5) खून के जरिए दिमाग तक पहुंच रहे हैं, जिससे चिड़चिड़ापन, नींद की कमी और लंबे समय में अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषित हवा के कारण बच्चों में एनीमिया (खून की कमी) और जन्म के समय कम वजन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
जयपुर के अस्थमा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ओपीडी में सांस लेने में दिक्कत, सिरदर्द और ब्रेन फॉग के मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। प्रदूषण का सबसे घातक असर बच्चों और बुजुर्गों पर देखा जा रहा है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों में रहने वाले लोग बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करें और अपनी डाइट में एंटीऑक्सीडेंट युक्त पौष्टिक भोजन शामिल करें ताकि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बनी रहे।
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