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India News: चंडीगढ़ के आईपीएस पूरन कुमार की आत्महत्या और उसके सुसाइड नोट के विवाद को लेकर हरियाणा सरकार की पुलिस ने काउंटर केस की रणनीति अपनाई है। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ अधिकारियों को बचाने के लिए एएसआई संदीप लाठर की आत्महत्या केस को आधार बनाकर पूरन कुमार और उनकी आईएएस पत्नी पर दबाव बनाने की व्यवस्था की जा रही है।
सरकार अब इस मामले को रफा-दफा करने के लिए एएसआई की आत्महत्या का मोहरा बना रही है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, डीजीपी और एसपी रोहतक द्वारा एडीजीपी पूरन कुमार का फोन न उठाने, पीएसओ को बंदी बनाकर कोरे कागज पर साइन कराने जैसी घटनाओं की वजह से पूरन कुमार ने प्रताड़ना से आहत होकर सुसाइड नोट लिखा था। दलितों के मुद्दे पर समाज में तीखी प्रतिक्रिया और अधिकारियों पर बने दबाव का सामना सरकार इसी फॉर्मूले से कर रही है।
सवाल यह उठ रहा है कि गिरफ्तार करने वाले एएसआई ने किन परिस्थितियों में आत्महत्या की? क्या वह बड़े अधिकारियों का मोहरा बन गया था और सबने उससे पल्ला झाड़ लिया, जिसके बाद उसने आत्महत्या का रास्ता चुना?
अब सरकार इसी केस का सहारा लेकर पूरन कुमार आत्महत्या मामले को दबाने, उनकी आईएएस पत्नी को सरेंडर कराने के प्रयास में जुटी है। डीजीपी की वापसी की संभावना भी इसी विवाद के समाधान पर टिकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि हरियाणा सरकार का यह रिस्क गंभीर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया का कारण बन सकता है। एक काउंटर केस बनाने की इस अनूठी प्रशासनिक कोशिश पर देश भर में चर्चा और बहस शुरू हो गई है।

