New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर इजरायल के लिए रवाना हो गए हैं। वैश्विक कूटनीति के लिहाज से यह दौरा अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री की अगवानी के लिए इजरायल ने विशेष तैयारियां की हैं; खुद प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू अपनी पत्नी सारा नेतन्याहू के साथ बेन गुरियन एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का स्वागत करेंगे। प्रोटोकॉल से हटकर दिया जा रहा यह सम्मान दोनों देशों के बीच की प्रगाढ़ होती दोस्ती का प्रतीक है।

‘आयरन डोम’ तकनीक पर टिकीं नजरें

इस यात्रा का सबसे प्रमुख एजेंडा रक्षा सहयोग है। सूत्रों के मुताबिक, इजरायल अपनी विश्व प्रसिद्ध ‘आयरन डोम’ (Iron Dome) वायु रक्षा प्रणाली की तकनीक भारत के साथ साझा करने का प्रस्ताव दे सकता है। भारत इस उन्नत तकनीक को अपने स्वदेशी ‘सुदर्शन चक्र’ कार्यक्रम के साथ एकीकृत कर सकता है, जिससे देश की हवाई सुरक्षा अभेद्य हो जाएगी। बता दें कि 2026 तक दोनों देशों के बीच 8.6 अरब डॉलर के रक्षा सहयोग का लक्ष्य है, जिससे इजरायल, फ्रांस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता बन जाएगा।

आर्थिक और तकनीकी साझेदारी के नए आयाम

रक्षा के साथ-साथ साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अंतरिक्ष विज्ञान में सहयोग बढ़ाने पर भी गहन चर्चा होगी। यरुशलम में एक संयुक्त इनोवेशन कार्यक्रम के जरिए इजरायल की हाई-टेक विशेषज्ञता और भारत की ‘स्केल’ क्षमता को जोड़ने की तैयारी है। आर्थिक मोर्चे पर, दोनों नेता मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में बातचीत को आगे बढ़ाएंगे, जिससे द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाई मिलेगी।

ऐतिहासिक संबोधन की तैयारी

अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी इजरायल की संसद ‘केनेस्सेट’ (Knesset) को संबोधित करेंगे। वे ऐसा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। यह संबोधन भारत की बढ़ती वैश्विक साख और इजरायल के साथ उसके रणनीतिक संबंधों की गहराई को प्रदर्शित करेगा। पिछले एक दशक में रक्षा, कृषि और तकनीक के क्षेत्र में दोनों देशों ने जिस तरह से कदमताल की है, यह यात्रा उसी साझेदारी को अगले स्तर पर ले जाने वाली साबित होगी।

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