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World News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इथियोपिया की संसद को संबोधित कर एक नया कूटनीतिक इतिहास रच दिया। यह दुनिया की 18वीं ऐसी संसद थी, जहां पीएम मोदी ने अपना भाषण दिया। अदीस अबाबा पहुंचने पर सांसदों ने जिस गर्मजोशी से उनका स्वागत किया, वह भारत-इथियोपिया के प्रगाढ़ होते रिश्तों की गवाही दे रहा था। संबोधन शुरू होने से पहले ही सांसदों ने खड़े होकर देर तक तालियां बजाईं और पीएम मोदी का उत्साहवर्धन किया।
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संसद के इस विशेष सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने इथियोपिया की तुलना अपने गृह राज्य गुजरात से की। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “आज आपके सामने खड़ा होना मेरे लिए गर्व की बात है। शेरों की धरती इथियोपिया में आकर मुझे घर जैसा महसूस हो रहा है क्योंकि भारत में मेरा घर गुजरात भी एशियाई शेरों का वास स्थल है।”
‘वंदे मातरम’ और इथियोपिया की मातृभूमि प्रेम का अद्भुत संगम
पीएम मोदी ने भारत के 1.4 बिलियन लोगों की ओर से दोस्ती और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने इथियोपियाई सभ्यता की प्राचीनता और आधुनिक उम्मीदों के संतुलन की जमकर तारीफ की। अपने भाषण में उन्होंने एक बेहद दिलचस्प समानता का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ और इथियोपिया के राष्ट्रीय गान, दोनों में ही अपनी जमीन को ‘मां’ कहकर पुकारा गया है। यह साझा संस्कृति हमें अपनी विरासत पर गर्व करने और मातृभूमि की रक्षा की प्रेरणा देती है।
पीएम मोदी ने अपनी सरकार के मूल मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ को वैश्विक मंच पर रखते हुए कहा कि भारत और इथियोपिया का नजरिया एक समान है। उन्होंने अदवा विजय स्मारक पर फूल चढ़ाकर इथियोपिया के गौरवशाली इतिहास को नमन किया और मिले हुए सर्वोच्च सम्मान को सवा सौ करोड़ भारतीयों की ओर से विनम्रता से स्वीकार किया। सांसदों की गड़गड़ाहट के बीच पीएम ने साफ किया कि भारत भविष्य की चुनौतियों में इथियोपिया के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार है।

