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India News: प्रकाश पर्व जैसे पवित्र मौके पर पाकिस्तान ने एक बार फिर वही चेहरा दिखाया, जिसे भारत कई बार देख चुका है। ननकाना साहिब दर्शन के लिए भारत से रवाना हुए पहले जत्थे में सिख श्रद्धालुओं का तो ताजे फूलों से स्वागत हुआ, लेकिन जब बात हिंदू यात्रियों की आई, तो अचानक रुकावट खड़ी कर दी गई।
इमिग्रेशन पूरा… फिर भी रोक दिया
दिल्ली के अमरचंद अपने परिवार के सात सदस्यों के साथ पहुंचे थे। सबने इमिग्रेशन पूरा किया, टिकट तक ले ली। बस पर चढ़ने ही वाले थे कि पाक अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा — “आप हिंदू हैं, आप नहीं जा सकते।”
इतना सुनते ही कई लोग अवाक रह गए। कोई गुस्से में था, कोई निराश। लखनऊ से आए श्रद्धालुओं को भी वही आदेश मिला — वापस जाओ।
भारत का एतराज़ — ‘धर्म देखकर रोकना निंदनीय’
भारतीय अधिकारियों ने इसे चौंकाने वाला बताया। उनका कहना है कि यह पहला मौका है जब धर्म के आधार पर यात्रा रोकी गई हो। और यह सिर्फ सामान्य घटना नहीं, बल्कि रिश्तों में दरार डालने की कोशिश है।
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खुफिया एजेंसियों को शक है कि यही पॉलिसी आने वाले वक्त में करतारपुर कॉरिडोर पर भी लागू की जा सकती है। याद रहे — ऑपरेशन सिंदूर के बाद से करतारपुर मार्ग बंद है।
कितने लोग गए और कितने लौटे?
पाकिस्तान ने इस बार करीब 2,100 श्रद्धालुओं को वीज़ा जारी किया था।
लेकिन
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केवल 1,796 सिख श्रद्धालु पहुंचे
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लगभग 300 लोग बॉर्डर पर अटक गए
कई ने वहीं विरोध भी किया, मगर अंत में उन्हें लौटना पड़ा।
भारतीय प्रतिक्रिया की तैयारी
कूटनीतिक हलकों में चर्चा है कि भारत सरकार इस मुद्दे को औपचारिक रूप से पाकिस्तान के सामने उठाएगी। जानकारों का कहना है कि यह कदम सिर्फ धार्मिक यात्रा पर रोक नहीं, बल्कि भारत के अंदर सिख-हिंदू एकता को तोड़ने की कोशिश भी है।

