India News: लोकसभा में वंदे मातरम् पर हुई विशेष चर्चा के दौरान एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को कड़े शब्दों में घेरा। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष वंदे मातरम् को देशभक्ति की कसौटी के रूप में थोपने की कोशिश कर रहा है, जो भारतीय संविधान के मूल मूल्यों के खिलाफ है।
सांसद ओवैसी ने अपनी बात पर ज़ोर देते हुए कहा कि भारत की आज़ादी की लड़ाई इसलिए सफल हुई, क्योंकि देश ने मुल्क और मजहब को एक नहीं बनाया।
आज़ादी की लड़ाई का संदर्भ
ओवैसी ने सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि आज वे लोग देशभक्ति का प्रमाण मांग रहे हैं जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई में कोई योगदान ही नहीं दिया। उन्होंने कहा कि सच्ची देशभक्ति तब होगी जब देश गरीबी, बेरोज़गारी और सामाजिक असमानता को दूर करेगा, न कि सिर्फ नारे लगाने या गीत गाने से।
ओवैसी ने तीखे लहजे में सवाल किया, “क्या वंदे मातरम् को वफादारी का टेस्ट बनाना चाहते हैं? क्या देशभक्ति साबित करने के लिए लोगों को मजबूर किया जाएगा?” उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी तरह की जबरदस्ती संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन होगी।
आस्था थोपना लोकतांत्रिक भावना के विरुद्ध
ओवैसी ने धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत मान्यताओं का मुद्दा भी मजबूती से उठाया। उन्होंने अपनी धार्मिक आस्था का जिक्र करते हुए कहा, “हम अपनी मां की इबादत नहीं करते, हम कुरान की भी इबादत नहीं करते। इस्लाम में अल्लाह के सिवा कोई खुदा नहीं।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर कोई वंदे मातरम् कहना चाहता है, तो वह जरूर कहे, लेकिन इसे अनिवार्य मत बनाइए। उनका कहना था कि हिंदुस्तान से मोहब्बत करना और उसकी पूजा करना दोनों अलग बातें हैं, और किसी पर आस्था थोपना पूरी तरह से लोकतांत्रिक भावना के विरुद्ध है। अंत में, उन्होंने सत्तापक्ष पर वतन-परस्ती को मजहब में तब्दील करने का आरोप लगाया और कहा, “वतन मेरा है, हम इसे छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। लेकिन वफादारी का सर्टिफिकेट हमसे मत लीजिए।“



