Patna News: बिहार की सियासत में ‘यात्रा’ शब्द का पर्यायवाची बन चुके मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर अपने रथ पर सवार होने को तैयार हैं। नए साल की शुरुआत के साथ ही मुख्यमंत्री ने जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की नब्ज टटोलने का मन बना लिया है। यह उनकी 16वीं राज्यव्यापी यात्रा होगी, जिसे लेकर पटना से लेकर जिलों के समाहरणालय तक प्रशासनिक महकमे में अभी से खलबली मच गई है।

ठंड का पारा गिरते ही बढ़ेगा सियासी तापमान

भले ही वर्तमान में बिहार कड़ाके की ठंड की चपेट में है, लेकिन सरकारी गलियारों में हलचल तेज है। मुख्यमंत्री सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, जैसे ही ठंड का असर कम होगा, यात्रा की आधिकारिक तारीखों का ऐलान कर दिया जाएगा। इस प्रस्तावित दौरे का मुख्य उद्देश्य केवल फाइलों में चल रहे विकास को नहीं, बल्कि धरातल पर उसकी असली तस्वीर को देखना है। सीएम नीतीश खुद योजनाओं की स्थलीय समीक्षा करेंगे और मौके पर ही अधिकारियों को दिशा-निर्देश देंगे।

राजीव रंजन बोले- “यह जन-सरोकार की यात्रा है”

जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने इस यात्रा को बिहार के भविष्य के लिए निर्णायक बताया है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की यात्राएं केवल भ्रमण नहीं, बल्कि जनता की आकांक्षाओं को समझने का जरिया रही हैं। 16वीं बार निकलने वाली यह यात्रा बिहार को देश के ‘टॉप 5’ सफल राज्यों में शामिल करने के संकल्प को मजबूती देगी। जदयू प्रवक्ता ने दावा किया कि इन यात्राओं से निकलने वाले सुझावों के आधार पर ही मुख्यमंत्री ने अतीत में बड़े और दूरगामी फैसले लिए हैं।

जिलों में शुरू हुई ‘क्लीनिंग’ की तैयारी

मुख्यमंत्री की यात्रा की सुगबुगाहट मात्र से ही जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। योजनाओं की समीक्षा के डर से अफसर अब फाइलों को अपडेट करने और अधूरे कामों को पूरा करने में जुट गए हैं। यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री न केवल सरकारी योजनाओं का निरीक्षण करेंगे, बल्कि आम जनता से सीधा संवाद कर उनके फीडबैक भी लेंगे। यह यात्रा बिहार में प्रशासनिक निगरानी को और अधिक पारदर्शी और सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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