India News: मराठी अस्मिता पर दिए गए विवादित बयान को लेकर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे एक बड़े विवाद में फंसते नजर आ रहे हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने पहले तो उनसे माफी की मांग की, लेकिन जब उन्होंने माफी नहीं मांगी, तो मनसे नासिक शहर अध्यक्ष सुदाम कोंबडे ने उनके खिलाफ नासिक जिला सत्र न्यायालय में याचिका दायर कर दी है। याचिका में भारतीय दंड संहिता की धारा 352 और 356 के तहत अवमानना का आरोप लगाया गया है।

क्या था निशिकांत दुबे का विवादित बयान?

सांसद निशिकांत दुबे ने हाल ही में मराठी समुदाय पर टिप्पणी करते हुए कहा था,
“तुम मराठी लोग हमारे पैसों पर पलते हो। बताओ कितना टैक्स देते हो?”
इस बयान के बाद महाराष्ट्र में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी इस बयान की कड़ी निंदा की थी।

अब कोर्ट की शरण में मनसे

जब दुबे ने माफी मांगने से इनकार कर दिया, तो सुदाम कोंबडे ने नासिक कोर्ट में याचिका दायर की।
कोंबडे ने चेतावनी दी है कि अगर सांसद दुबे नासिक आते हैं, तो उन्हें ‘मनसे स्टाइल’ में सबक सिखाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ मनसे का नहीं, बल्कि पूरे मराठी समाज का अपमान है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मीरा-भायंदर की घटना से और भड़की मनसे

इस बीच मीरा-भायंदर इलाके में एक प्रवासी दुकानदार द्वारा मराठी न बोलने पर मनसे कार्यकर्ताओं ने उस पर हाथ उठा दिया।
इस घटना ने भी मराठी बनाम अमराठी विवाद को और उग्र कर दिया।

फडणवीस ने दी सांसद को चुप रहने की सलाह

इस पूरे विवाद को देखते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी सांसद निशिकांत दुबे को सार्वजनिक रूप से बयान न देने की सलाह दी है।
फडणवीस ने कहा,
“महाराष्ट्र में मराठी और गैर-मराठी के बीच कोई तनाव नहीं है। लेकिन कुछ लोग जानबूझकर विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में सांसद दुबे को इस मुद्दे पर आगे कुछ भी बोलने से बचना चाहिए।”

राजनीतिक मोड़ और आगामी असर

यह मामला केवल एक बयान भर नहीं रह गया है। अब यह राजनीतिक अस्मिता और क्षेत्रीय भावना से जुड़ चुका है।
मनसे और शिवसेना (यूबीटी) इस मुद्दे को महाराष्ट्र के सम्मान से जोड़कर देख रही हैं, वहीं भाजपा को अपने सांसद के बयान से बैकफुट पर आना पड़ रहा है।

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