Patna: पटना की गलियों में आज हवा का रुख ही कुछ बदला-बदला सा था। मुख्यमंत्री आवास के बाहर कार्यकर्ताओं का जो हुजूम और उत्साह दिखा, उसने साफ कर दिया कि बिहार की राजनीति में एक नया सितारा चमकने को तैयार है। जी हां, लंबे इंतजार के बाद सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने राजनीति के मैदान में अपना पहला कदम रख दिया है। जैसे ही निशांत ने जेडीयू की सदस्यता ली, पूरे प्रदेश के कार्यकर्ताओं में गजब की ऊर्जा दौड़ गई।

निशांत ने पार्टी में शामिल होते वक्त बहुत ही सधे हुए अंदाज में कहा कि वे लाखों कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करते हैं और उनका मकसद सिर्फ और सिर्फ बिहार के विकास के संकल्प को आगे बढ़ाना है। असल में निशांत का ये फैसला कोई अचानक लिया गया कदम नहीं लगता। सालों से बिहार के युवा उनकी ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे थे। भले ही वे अब तक राजनीति से दूर थे और अपनी पढ़ाई-लिखाई और समाज सेवा में लगे थे, लेकिन नीतीश कुमार के बेटे होने के नाते उन पर हमेशा से एक दबाव था। अब उन्होंने युवाओं की सोच को पार्टी से जोड़ने का बीड़ा उठा लिया है।

पार्टी दफ्तर में जब सदस्यता का कार्यक्रम हुआ, तो खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार काफी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि निशांत का आना बिहार के लिए एक नई ऊर्जा की तरह है। अब जिम्मेदारी राज्य के युवाओं पर है कि वे निशांत के अनुभव और नई सोच के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें। निशांत के आते ही जेडीयू में मानो नई जान आ गई है। पटना से लेकर गांव-गांव तक कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं और उन्हें अपनी आवाज मान रहे हैं

अब चर्चा ये है कि निशांत के आने से शिक्षा, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर के कामों में और तेजी आएगी। निशांत ने भी अपनी पहली सभा में साफ कर दिया कि उनका लक्ष्य ‘विकसित बिहार’ बनाना है। इधर निशांत गांवों के दौरे पर निकल चुके हैं और उधर विपक्षी खेमे में थोड़ी बेचैनी और सतर्कता बढ़ गई है। देखना दिलचस्प होगा कि निशांत की ये ‘युवा सोच’ बिहार की राजनीति को किस नई ऊंचाई पर ले जाती है!

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