India News: देश में संपत्ति खरीद-फरोख्त को पारदर्शी बनाने और बेनामी संपत्तियों पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके लिए “नया पंजीकरण विधेयक-2025” लाया गया है, जिसके तहत अब हर प्रॉपर्टी डील पैन और आधार आधारित ओटीपी सत्यापन के तहत की जाएगी।
इस नई प्रणाली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक संपत्ति लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड हो और आयकर विभाग को इसकी जानकारी तुरंत प्राप्त हो सके।
कैसे काम करेगी यह नई व्यवस्था?
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पैन और आधार का दोहरा सत्यापन:
संपत्ति खरीदने और बेचने वाले दोनों पक्षों के पैन कार्ड और आधार की ओटीपी के जरिए डिजिटल सत्यापन किया जाएगा। -
अंतिम मंजूरी प्रक्रिया:
रजिस्ट्रेशन के समय सब-रजिस्ट्रार को अधिकृत मोबाइल पर एक ओटीपी प्राप्त होगा, जिससे वे ट्रांजेक्शन को अंतिम स्वीकृति देंगे। -
डिजिटल रिपोर्टिंग:
लेनदेन की पूरी डिजिटल कॉपी सत्यापन के तुरंत बाद आयकर विभाग को भेजी जाएगी, जिससे कोई भी संदिग्ध खरीद तुरंत पकड़ी जा सके। -
AI आधारित निगरानी:
आयकर विभाग का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम खरीदार की पिछले 5–6 वर्षों की आय और संपत्ति की जानकारी का विश्लेषण करेगा। अगर कोई व्यक्ति अपनी घोषित आय से अधिक की संपत्ति खरीदता है, तो ऑटोमेटिक नोटिस जारी कर दिया जाएगा।
यूपी बना पहला राज्य, अब पूरे देश में होगी पारदर्शी रजिस्ट्री
उत्तर प्रदेश पहले ही इस प्रणाली को लागू कर चुका है। वहां हर संपत्ति रजिस्ट्री की डिजिटल कॉपी सीधे आयकर विभाग तक पहुंच रही है। अब यह नियम देशभर में लागू किया जाएगा, जिससे संपत्ति लेनदेन में पारदर्शिता आएगी।
दान और गिफ्ट में दी गई संपत्तियां भी अब रडार पर
इस नए सिस्टम की सबसे खास बात यह है कि यह दान या गिफ्ट के रूप में दी गई संपत्तियों को भी ट्रैक करेगा। पिछले कुछ वर्षों में सामने आया है कि लोग बेनामी खरीद को छिपाने के लिए दूसरों के नाम पर संपत्ति खरीदते हैं और फिर उसे “दान” के रूप में ट्रांसफर कर देते हैं। अब यह खेल नहीं चलेगा।
विधेयक की अन्य मुख्य विशेषताएं
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ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा:
अब लोग घर बैठे संपत्ति की डिजिटल रजिस्ट्री कर सकेंगे। इससे भौतिक दस्तावेजों और बार-बार सरकारी दफ्तर जाने की जरूरत खत्म हो जाएगी। -
अनिवार्य रजिस्ट्रेशन का दायरा बढ़ा:
अब सिर्फ विक्रय पत्र ही नहीं, बल्कि पावर ऑफ अटॉर्नी, वसीयत, विक्रय अनुबंध और न्यायिक प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों का भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से बेनामी संपत्ति पर प्रभावी रोक लगेगी, आयकर चोरी रुकेगी और आम जनता को भी रियल एस्टेट ट्रांजेक्शन में पारदर्शिता मिलेगी।



