India News: गुजरात के मुजफ्फरनगर के बघरा कस्बे में पांच साल की बच्ची जाह्नवी के साथ खेलते समय बड़ी दुर्घटना हो गई। खेल-खेल में उसकी नाक में घड़ी का छोटा सेल चला गया, जिससे उसकी सांसें रुकने लगीं। परिजन घबरा गए और इलाज के लिए निजी डॉक्टरों के चक्कर लगाते रहे। लेकिन उचित मदद न मिलने पर बच्ची की जिंदगी खतरे में आ गई।

निजी डॉक्टर ने मांगे रुपये, परिवार पहुंचा जिला अस्पताल

जाह्नवी की मां मिताक्षी ने बताया कि पहले उसे एक निजी डॉक्टर को दिखाया गया। डॉक्टर ने टॉर्च से देखकर बताया कि नाक में कोई चीज फंसी है। इसके बाद ईएनटी स्पेशलिस्ट के पास ले गए, लेकिन वहां इलाज के नाम पर पांच हजार रुपये मांगे गए। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण परिवार बच्ची को जिला अस्पताल ले गया।

जिला अस्पताल में समय पर हुआ इलाज

जिला अस्पताल के ईएनटी विभाग के डॉक्टरों ने जांच कर पाया कि नाक की नली में घड़ी का सेल फंसा है और बच्ची को सांस लेने में कठिनाई हो रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बताया कि इतनी छोटी बच्ची को बेहोश कर ऑपरेशन करना खतरनाक होता, इसलिए उन्होंने बिना चीरा लगाए ही दूरबीन तकनीक का सहारा लिया।

बिना चीरा निकाला सेल, परिजनों ने जताया आभार

करीब आधे घंटे तक चली सर्जरी जैसी प्रक्रिया के बाद डॉक्टरों ने सेल को सफलतापूर्वक निकाल लिया। जैसे ही सेल बाहर आया, बच्ची ने तुरंत सामान्य रूप से सांस लेना शुरू कर दिया। परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू भर आए।
डॉक्टरों का कहना है कि अगर सेल और देर तक नाक में फंसा रहता तो उसके रिसाव से ऊतक जल सकते थे और बच्ची की जान पर गंभीर खतरा हो सकता था।

मासूम की जान बचने पर खुशियां

जाह्नवी की मां ने कहा कि जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने समय पर मदद कर उनकी बच्ची की जिंदगी बचाई। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि सावधानी और सही समय पर इलाज से किसी की जान बचाई जा सकती है।

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