Bihar News: गंगा का जलस्तर एक बार फिर से बढ़ने लगा है। इसके साथ ही बाढ़ पीड़ितों की परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। उनके पास न खाने के लिए खाना है और न पीने के लिए स्वच्छ पानी। यहां तक की मवेशियों के साथ वे सोने को मजबूर हो रहे हैं।

तंबू में जानवरों के साथ सो रहे बाढ़ पीड़ित

बाढ़ पीड़ितों की स्थिति इतनी दयनीय है कि वे अपने मवेशियों के साथ एक ही तंबू में रात बिताने को मजबूर हैं। पन्नी की छत के नीचे कभी तेज धूप और लगातार बारिश से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। एक तरफ मवेशियों के चारे की समस्या है तो दूसरी ओर इंसानों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना ही रोज का संघर्ष बन गया है। लोग बताते हैं कि शुरुआती दिनों में सरकार की ओर से भोजन और पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराया गया था। लेकिन अब वह मदद भी ठप हो चुकी है। परिवार के छोटे-छोटे बच्चे भूख से बिलखते हैं, जबकि महिलाएं खुले आसमान के नीचे चूल्हा जलाने की जद्दोजहद करती नजर आती हैं। जलावन के लिए लकड़ी और पशुओं के चारे के लिए रोजाना जद्दोजहद करनी पड़ रही है।

न खाना है और न पीने का पानी…

मुसीबत केवल भूख-प्यास तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बीमारियों का खतरा भी उनके सिर पर मंडरा रहा है। गंदे पानी और अस्वच्छ माहौल में रहने से बच्चों और बुजुर्गों को खांसी-जुकाम और बुखार जैसी बीमारियां जकड़ने लगी हैं। वहीं, मवेशियों की हालत भी बिगड़ रही है। एक बाढ़ पीड़ित महिला ने कहा कि “घर डूब गया, सबकुछ पानी में चला गया। अब तो तंबू में ही जानवरों के साथ सोना पड़ता है। खाने के लिए जो थोड़ा-बहुत मिलता है, उसी से बच्चों को पेट भरते हैं। हम खुद भूखे रह जाते हैं। पिछले करीब एक महीने से घर लौटने की आस में खुले आसमान के नीचे रह रहे लोग अब पूरी तरह से निराश दिखने लगे हैं।

मुंगेर के सीताचरण दियारा से सैकड़ों परिवारों ने ऊंचे स्थानों पर शरण ली है। कलेक्ट्रेट के सामने स्थित किला परिसर में लोग पन्नी का तंबू डालकर अपने परिवार और मवेशियों के साथ रहने को मजबूर हैं। पहली बार गंगा का पानी चढ़ा तो लोगों ने अपना घर-बार छोड़ ऊंचे स्थानों की ओर पलायन किया। बीच में जब पानी घटा तो उम्मीद जगी कि अब शायद घर लौट पाएंगे। मगर, किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। अचानक गंगा का जलस्तर फिर से बढ़ गया और उनके गांव, खेत और घर पानी में डूब गए। अब उनके घरों में 4 से 5 फीट तक पानी भरा है, जिससे वापसी का रास्ता पूरी तरह से बंद हो गया है।

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