M.P. News: मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा तैयार की जा रही अत्याधुनिक ड्रोन विंग अब देशभर के लिए एक नया मॉडल बनने जा रही है। तकनीक आधारित पुलिसिंग को भविष्य की जरूरत मानते हुए केंद्र और राज्यों के स्तर पर इसे बड़े पैमाने पर लागू करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। कानून-व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए पुलिस को अब जमीन के साथ-साथ आसमान से भी निगरानी की ताकत मिलने वाली है।
सूत्रों के मुताबिक मध्यप्रदेश के इस मॉडल को देखते हुए उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों ने ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था को लेकर शुरुआती प्रस्ताव तैयार कर लिए हैं। इन राज्यों में भी जल्द ही अलग से पुलिस ड्रोन विंग बनाई जा सकती है।
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इस योजना के तहत ऐसे ड्रोन शामिल किए जाएंगे, जो लंबी दूरी तक उड़ान भर सकें और कई घंटों तक लगातार निगरानी कर सकें। खासतौर पर फिक्स्ड विंग ड्रोन पर जोर दिया जा रहा है, ताकि सीमावर्ती इलाकों, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, बड़े प्रदर्शनों और संवेदनशील जिलों में बेहतर निगरानी रखी जा सके। इससे किसी भी स्थिति में पुलिस को तुरंत हालात की जानकारी मिल सकेगी।
ड्रोन विंग को अपराध नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन, वीआईपी सुरक्षा और ट्रैफिक मॉनिटरिंग जैसी अहम जिम्मेदारियां दी जाएंगी। इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं के दौरान ड्रोन तकनीक पुलिस के लिए बेहद मददगार साबित होगी। भूकंप, बाढ़, जंगल की आग या सड़क हादसे जैसी स्थितियों में ड्रोन से ली गई लाइव तस्वीरें सीधे कंट्रोल रूम तक पहुंचेंगी, जिससे राहत और बचाव कार्य तेजी से किए जा सकेंगे।
मध्यप्रदेश की तर्ज पर अन्य राज्यों में भी ड्रोन पायलट और तकनीकी स्टाफ के लिए खास ट्रेनिंग सेंटर खोलने की योजना है। कुछ राज्यों में मौजूदा पुलिस ट्रेनिंग अकादमियों को ही ड्रोन ट्रेनिंग नोडल सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां पुलिसकर्मियों को ड्रोन उड़ाने के साथ-साथ लाइव फीड मॉनिटरिंग और डेटा एनालिसिस की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन तकनीक से अपराधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ेगा और कानून-व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी तरीके से संभाला जा सकेगा। आने वाले समय में ड्रोन आधारित पुलिसिंग देश की सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बनने जा रही है। स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में यह कदम बड़ा बदलाव ला सकता है।



