India News: देशभर में मानसून की वापसी की घोषणा हो चुकी है, लेकिन मौसम की बेरुखी अभी भी जारी है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बने गहरे दबाव तथा पाकिस्तान के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ ने लौटते मानसून की रफ्तार धीमी कर दी है। इसके असर से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और झारखंड सहित कई राज्यों में एक बार फिर से भारी बारिश का दौर शुरू हो गया है।
खरीफ फसलों पर मंडराया खतरा
मौसम विभाग ने पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी यूपी के किसानों को खास सलाह दी है कि वे खेतों में खड़ी धान, दाल और तिलहन जैसी फसलों को तुरंत काटकर सुरक्षित स्थान पर रख लें। क्योंकि देर की स्थिति में बारिश और तेज हवाओं की वजह से फसलें बर्बाद हो सकती हैं। ग्रामीण इलाकों में खलिहानों में रखी फसलें भीगने और सड़ने का खतरा भी बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल खरीफ की पैदावार पर असर पड़ेगा बल्कि रबी फसलों की बुआई भी देर से शुरू होने की आशंका बढ़ जाएगी।
पंजाब-हरियाणा में बारिश का दौर
वीरवार को पंजाब के जालंधर, लुधियाना और होशियारपुर समेत कई जिलों में तेज वर्षा हुई। धान के बोरे मंडियों में भीग गए, जिससे किसानों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 4 अक्टूबर को भी कई जिलों में बारिश होगी और 5 से 7 अक्टूबर तक ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे नुकसान का खतरा दोगुना है।
झारखंड में तीन दिन का अलर्ट जारी
इधर झारखंड में भी मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव का असर साफ तौर पर दिखने लगा है। मौसम विभाग, रांची के अनुसार, कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है। इसके साथ ही 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने और वज्रपात होने की संभावना है। खासकर 4 अक्टूबर को कुछ जिलों में जमकर बारिश हो सकती है। आने वाले दिनों में तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट का अनुमान है।
किसानों को चेतावनी और अपील
मौसम विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपने खेतों और फसल को तुरंत सुरक्षित करने के उपाय करें। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बारिश का यह दौर लंबा खिंचता है तो धान और तिलहन जैसी खरीफ फसलें बुरी तरह प्रभावित होंगी। इससे किसानों को न केवल सीजनल फसल में नुकसान होगा, बल्कि आगामी रबी फसल की बुआई भी प्रभावित हो सकती है।
कुल मिलाकर, मौसम विभाग की यह सलाह साफ है कि देर करना भारी पड़ सकता है। समय रहते फसल काटकर सुरक्षित रखना ही किसानों के लिए सबसे बड़ा बचाव है।



