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Ranchi News : झारखंड की सांस्कृतिक पहचान और लोकभाषा की मर्यादा को बचाने के उद्देश्य से केन्द्रीय सरना समिति ने एक निर्णायक कदम उठाया है। समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा के नेतृत्व में आज झारखंड के पुलिस महानिदेशक अनुराग गुप्ता को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें झारखंडी लोकसंगीत में बढ़ती अश्लीलता, फुहड़ता और सांस्कृतिक प्रदूषण पर रोक लगाने की माँग की गई।
ज्ञापन सौंपते हुए श्री बबलू मुंडा ने कहा, “झारखंड की पहचान उसकी लोकभाषाओं, आदिवासी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से है। परंतु हाल के वर्षों में लोकसंगीत के नाम पर सोशल मीडिया और मंचीय कार्यक्रमों में जिस तरह की अशोभनीय और संस्कारहीन सामग्री प्रस्तुत की जा रही है, वह हमारी सांस्कृतिक अस्मिता पर सीधा हमला है।”
उन्होंने कहा कि इन गीतों में अभद्र भाषा, नारी विरोधी भाव और गम्भीरता-विहीन प्रस्तुतिकरण युवाओं को गलत दिशा में ले जा रहा है। यह न केवल आदिवासी गौरव को ठेस पहुँचाता है, बल्कि समाज में विकृति भी फैला रहा है।
ज्ञापन में प्रमुख माँगें:
- अश्लील और फुहड़ गीतों के निर्माण, प्रदर्शन और प्रचार पर प्रभावी रोक लगाई जाए।
- मंचीय कार्यक्रमों और सोशल मीडिया पर सांस्कृतिक मर्यादा के उल्लंघन पर प्रशासनिक निगरानी बढ़े।
- यूट्यूब और सोशल मीडिया पर प्रसारित आपत्तिजनक वीडियो पर साइबर सेल द्वारा कानूनी कार्रवाई हो।
- लोक कलाकारों व आयोजकों को सांस्कृतिक दिशा-निर्देश दिए जाएं।
- सकारात्मक और प्रेरणादायक लोकगीतों को प्रशासनिक सहयोग से प्रोत्साहन मिले।
बबलू मुंडा ने विश्वास जताया कि राज्य पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेते हुए झारखंड की सांस्कृतिक गरिमा की रक्षा में ठोस कार्रवाई करेगी।
इस अवसर पर समिति के महासचिव महादेव टोप्पो, पवन रॉय, पंकज रॉय, अनीता बाड़ा, मोनिका मुंडू, विजय प्रभाकर, रवि स्टूडियो, बबलू स्टूडियो, सरसती बुनकर, राजू करकेटा, आशीष तिग्गा सहित दर्जनों सांस्कृतिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।

