India News: महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ में करोड़ों रुपये के अनियमित भुगतान का मामला सामने आया है। केवल महिलाओं को लाभ देने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना के तहत 12,431 पुरुषों ने भी गलत तरीके से लाभ उठाया है।
सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत सामने आए दस्तावेजों में महिला एवं बाल विकास विभाग ने पुष्टि की है कि 2024 से 2025 के बीच पुरुषों के खातों में योजनागत भुगतान हुआ। विभाग ने कहा कि सत्यापन के दौरान ये गड़बड़ियां पकड़ी गईं, जिसके बाद उन्हें लाभार्थी सूची से हटाया गया।
अपात्र महिलाओं और सरकारी कर्मचारियों ने भी उठाया लाभ
आरटीआई रिपोर्ट के अनुसार, केवल पुरुष ही नहीं बल्कि 77,980 ऐसी महिलाओं को भी योजना का लाभ मिला, जो पात्रता मानकों पर खरी नहीं उतरती थीं। इन दोनों वर्गों को मिलाकर कुल 164.52 करोड़ रुपये गलत खातों में भेज दिए गए — जिनमें लगभग 24.24 करोड़ रुपये पुरुषों को और 140.28 करोड़ रुपये महिलाओं को दिए गए।
इस योजना के तहत योग्य महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता मिलनी थी। जून 2024 में शुरू हुई यह योजना विधानसभा चुनाव से ठीक चार महीने पहले लॉन्च की गई थी। अगस्त 2024 में शिंदे-फडणवीस-अजित पवार सरकार ने इसके प्रचार हेतु 199.81 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत किया था।
सरकारी कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल
महिला एवं बाल विकास विभाग के एक अन्य आरटीआई जवाब में बताया गया कि लगभग 2,400 सरकारी कर्मचारियों ने भी इस योजना का गलत लाभ उठाया, जिनमें कई पुरुष शामिल हैं। इनमें कृषि, आदिवासी विकास, सामाजिक कल्याण और जिला परिषदों के कर्मचारी शामिल हैं।
अब तक इन गलत भुगतानों में किसी भी लाभार्थी से राशि की वसूली नहीं हुई है और न ही किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
मंत्री ने मानी गड़बड़ी, सत्यापन अभियान जारी
महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिती तटकरे ने अगस्त 2025 में एक्स (Twitter) पर बताया था कि शुरुआती जांच में 26 लाख से अधिक लाभार्थी अपात्र पाए गए हैं। उन्होंने कहा, “सत्यापन के बाद अपात्र पाए जाने वालों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और अजीत पवार के मार्गदर्शन में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
सरकारी सूत्रों ने कहा कि यह गड़बड़ी केवल शुरुआत है। अब तक 26.34 लाख खातों में फर्जी भुगतान की शंकाओं के चलते वितरण जून-जुलाई 2025 से रोक दिया गया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि जस-जैसे ई-केवायसी सत्यापन आगे बढ़ेगा, अनियमितताओं की कुल राशि और भी बढ़ सकती है।
जांच में लापरवाही का खुलासा
अधिकारियों ने माना कि योजना लागू करते समय पर्याप्त जांच नहीं की गई थी। पुरुष लाभार्थियों को जुलाई 2024 से जुलाई 2025 तक भुगतान किया गया और बाद में भुगतान रोक दिया गया। विभाग ने बताया कि अपात्र लाभार्थियों में से कई की पारिवारिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक थी या उन्होंने गलत जानकारी दी थी।
कई मामलों में एक ही परिवार के दो या अधिक सदस्यों को भी योजना का लाभ मिलता पाया गया। इन गड़बड़ियों को रोकने के लिए अब सरकार ने ई-केवायसी सत्यापन प्रक्रिया को सभी वर्तमान और नए लाभार्थियों के लिए अनिवार्य किया है।
यह खुलासा न केवल सरकारी तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि चुनावी वर्ष में योजनाओं के प्रबंधन में कितनी बड़ी खामियां रह गईं। अब सबकी नज़र सरकार की अगली कार्रवाई और वसूली नीति पर है।



